सिलीगुड़ी, मोहन झा। सड़क हादसों में लगातार हो रही लोगों की मौत और घायलों की बढ़ती संख्या से सुप्रीम कोर्ट भी चिंतित है। यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित यातायात के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किया है। फाइलों में तो सभी निर्देशों का पालन किया जा रहा है,लेकिन जमीनी हकीकत फाइलों के परे है। इस पर शासन-प्रशासन को समीक्षा करने की आवश्यकता है।

आपदा से अधिक सड़क हादसा में मौत 

आंकड़ों पर गौर करें तो प्रत्येक वर्ष प्राकृति आपदा व महामारी की वजह से होने वाली मौत से सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या कई गुणा अधिक है। प्रति वर्ष बढ़ते इन आंकड़ो से सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को लेकर बीते अप्रैल महीने में केंद्र व राज्य सरकार के साथ शासन और प्रशासन के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने लगातार हादसे वाली जगह अर्थात ब्लैक स्पाट को चिन्हित करने के साथ सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रोड का डिजाइन बदलने का निर्देश दिया। इसके साथ ही ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर निगरानी के लिए सड़कों पर आवश्यकता के अनुसार सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए। इस व्यवस्था पर निगरानी और कार्रवाई के लिए टास्क फोर्स गठन करने की भी सलाह दी। वहीं प्रत्येक जिले में आवश्यकता के अनुसार या कम से कम एक ट्रामा केयर सेटर बनाने का निर्देश दिया। इसके अलावा सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से दुर्घटनाओं की जानकारी पब्लिक पोर्टल पर उपलब्ध कराने और सड़क सुरक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्देश केंद्र और राज्य सरकार को दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिए ये निर्देश भी  

यही नहीं और भी कई निर्देश दिए गए हैं। सड़क हादसों को रोकने के लिए अलग-अलग राज्यों में कार्य कर रही कमेटी और एनजीओ को मिलाकर राज्य के प्रत्येक जिले में एक कमेटी गठन का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने दिया। यह कमेटी न सिर्फ हादसों की समीक्षा करेगी, बल्कि उन्हें रोकने के लिए कदम उठाएगी। जिलाधिकारी के नेतृत्व में बनने वाली इस कमेटी में पुलिस कमिश्नर, पुलिस अधीक्षक, स्वास्थ्य अधिकारी, पीडब्ल्यूडी अधिकारी, नगर निगम या नगरपालिका के अधिकारी भी शामिल होंगे। निर्देश में कहा गया कि उक्त कमेटी प्रत्येक पखवाड़े में आनलाइन और हर माह में प्रत्यक्ष बैठक करेगी। जिसमें महीने भर में हुए सड़क हादसों की समीक्षा, बड़े हादसों की फारेंसिक जांच कराने की व्यवस्था और इसकी जानकारी पब्लिक पोर्टल पर उपलब्ध कराना होगा। बल्कि ब्लैक स्पाट की पहचान करने की भी जिम्मेदारी इसी कमेटी की है।

नहीं हुआ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन 

जाहिर है सुप्रीम कोर्ट सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए काफी गंभीर है। लेकिन चिंता की बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन सिर्फ फाइलों में हो रहा है। जमीनी हकीकत कुछ और ही है। स्पेशल टास्क फोर्स तक का अब तक गठन नहीं हो सका है।

क्या है वास्तविक स्थिति

1- सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस ने तो शहर व आस-पास के इलाकों में सीसीटीवी कैमरा लगाकर निगरानी के लिए कंट्रोल रूम भी बनाया है। लेकिन शहर से होकर गुजरी राष्ट्रीय राजमार्ग, एशियन हाइवे आदि के अधिकांश इलाकों में सीसीटीवी की व्यवस्था नहीं है।

2- ब्लैक स्पाट को चिन्हित कर साइन बोर्ड लगाने का काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है। 

3-वाहनों की निगरानी के लिए पब्लिक वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाने का काम भी अधर में लटका हुआ है। हालांकि अधिकांश टैक्सी और राज्य परिवहन की बसों में जीपीएस की व्यवस्था की गई है। लेकिन राज्य परिवहन की अधिकांश वाहनों का जीपीएस सिस्टम खराब होने के बाद दोबारा ठीक नहीं कराया गया।

4- जिले में केवल एक लेवल-2 का ट्रामा केयर सेटर तैयार तो कराया गया, लेकिन इलाज करने वाले डाक्टरों की नियुक्ति ही नहीं हुई है।

5- इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार जागरूकता के लिए दुर्घटनाओं की जानकारी सार्वजनिक करने की व्यवस्था भी अभी तक शुरू नहीं हुई है।

वहीं दार्जिलिंग जिलाधिकारी पोन्‍नबल्‍लम का कहना हैै कि सु्प्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार निगरानी कमेटी का गठन किया गया है। प्रत्येक तिमाही में इस कमेटी की बैठक भी हो रही है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है।

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