कालिम्पोंग, [संवादसूत्र] । सुकना की जनसभा में रविवार को पड़ोसी राज्य सिक्किम के विषय में दिए गए बयान पर विरोध जारी है। अब तक जहां तामांग के विरोध में राजनीतिक दल ही आवाज बुलंद कर रहे थे किंतु अब इस क्रम में गैर सरकारी संगठन भी शामिल हो गए हैं। इस क्रम में बुधवार को कालिम्पोंग कृषक संगठन के विष्णु क्षेत्री ने विनय तामांग के बयान का विरोध जता सिक्किम के मुख्यमंत्री के संबंध में की गई टिप्पणी की निंदा करते हुए विनय तामांग से लिखित माफी मांगने की मांग की है।

क्षेत्री ने तामांग को राजनीति का ककहरा सीखने की नसीहत दे डाली। एक कदम आगे बढ़ते हुए उन्होने सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग से गोरखालैंड और गोरखा जाति के आंदोलन को आगे बढ़ाने की अपील की। तामांग पर बंगाल सरकार के इशारे पर पड़ोसी राज्य से वर्षों पुराने संस्कृति के संबंध को खत्म करने का आरोप लगाया है। संगठन ने तामांग के इस बयान को पूरे देश में गोरखा जाति को बदनाम करने वाला बताया। क्षेत्री ने कहा कि यदि गोरखा जाति के हित में कार्य करना चाहते हैं तो राज्य की विधानसभा से अलग राज्य का प्रस्ताव पारित करवाने की मांग करते हुए केंद्र सरकार के पास भेजने की बात कही। उन्होने कहा कि अगर तामांग ऐसा करते हैं तो उन पर विश्वास किया जा सकता है अन्यथा नहीं। क्षेत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि विनय तामांग सिक्किम

के बयान पर माफी मांगे वरना संगठन द्वारा आंदोलन चलाया जाएगा। क्षेत्री ने दावा करते हुए कहा कि अगर कभी गोरखालैंड राज्य का सपना सच होगा तो उसमें सिक्किम की भूमिका अहम होगी। संगठन महासचिव

ने कहा कि वर्ष 29 अक्टूबर 1986 को राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से श्वेत पत्र जारी कर दार्जिलिंग और कालिम्पोंग को भूभाग को सिक्किम राज्य का हिस्सा बताया था। ऐसे में यदि बसु के पत्र को ध्यान दिया जाए तो सिक्किम कभी भी दार्जिलिंग को वापस ले सकता है। ऐसे में तामांग

द्वारा सिक्किम राज्य पर कोई बयान देना तकनीकी तथा संवैधानिक तौर पर तर्कसंगत नहीं है। उन्होने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि गोरखा जाति के हितों की रक्षा का मामला केंद्र से जुड़ा है। क्षेत्री के अनुसार वर्ष 1950 में की गई संधि के अनुसार नेपाल देश से आवागमन सुगम करने के बाद समस्याओं का आरंभ हुआ था क्षेत्री

ने कहा कि बीते दिनों नवान्न में आयोजित सर्वदलीय बैठक पर मुख्यमंत्री ने कहा था कि बैठक में गोरखा जाति की समस्या को केंद्र का मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया था। कृषक कल्याण संगठन के महासचिव ने सिक्किम के मुख्यमंत्री को कुशल शासक  बताते हुए कहा कि तामांग को मुख्यमंत्री के पद की मर्यादा का ध्यान रखते हुए टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी।

उन्होने सिक्किम के मुख्यमंत्री डा पवन चामलिंग से गोरखा जाति के आंदोलन को आगे बढ़ाने की मांग की।

प्रेस वार्ता के दौरान क्षेत्री ने सिक्किम की सरकार और जनता से आग्रह करते हुए कहा कि गोरखा जाति की समस्या को मजबूती के समाधान करने के लिए सहयोग बनाए रखने की बात कही। क्षेत्री ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि कृषक कल्याण संगठन द्वारा स्वाभिमान आंदोलन आरंभ करने की बात कहते हुए जल्द इस कार्य की रूपरेखा तय कर करीब दस हजार युवाओं के साथ आगे बढ़ाने की जानकारी दी। 

Posted By: Preeti jha

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