कोलकाता, राज्य ब्यूरो। जड़ी-बूटी उत्पादन के विशेषज्ञ डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में हर्बल खेती की अपार संभावनाएं विद्यामान है। जड़ी-बूटी उत्पादन तथा हर्बल खेती के लिए नम जलवायु की जरूरत पड़ती है। नम जलवायु बंगाल को प्रकृति से उपहार में मिली है।

बंगाल के कुशल खेतीहर मजदूर व किसान हर्बल खेती को बढ़ाने में सहायक हैं। बांकुड़ा उन्नयनी इंस्टीच्यूट आफ इंजीनिय¨रग की ओर से हर्बल खेती व लाभदायक कृषि विषय पर आयोजित सेमिनार में भाग लेने कोलकाता पहुंचे डॉ त्रिपाठी ने दैनिक जागरण से खास बातचीत में यह बातें कही। उन्होंने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए उन्हें नकदी फसल उगाने के बारे में जानकारी देने की जरूरत है। परंपरागत खेती के अलावा औषधि जातीय पौधा और जड़ी-बूटी उत्पादन के बारे में किसानों को जागरूक करना होगा।

उन्होंने कहा कि विश्व में भारत की जड़ी-बूटी यानी हर्बल उत्पाद की मांग है। लेकिन इस क्षेत्र में चीन सबसे बड़ा निर्यातक है। भारत में जड़ी-बूटी का कारोबार पूरी तरह प्राकृतिक जंगल पर आधारित है। इसलिए भारतीय जड़ी-बूटी की विश्व भर में मांग होने के बावजूद हम निर्यात में पिछड़े हैं। सही ढंग से हर्बल की खेती कर हम इसे निर्यात करने में आगे हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ समेत दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में हर्बल खेती की शुरूआत हुई है लेकिन पश्चिम बंगाल जैसे नम जलवायु वाले क्षेत्र में जड़ी-बूटी उगाने की काफी संभावनाएं है।

बंगाल को अपने प्राकृतिक संसाधन का लाभ उठाना चाहिए। यहां हर्बल उत्पाद के लिए बाजार भी मौजूद है। कोलकाता पूर्वी क्षेत्र का बड़ा व्यवसायिक केंद्र है। कोलकाता से हर्बल उत्पाद का निर्यात विश्व के बाजार में आसानी से किया जा सकता है। 

Posted By: Preeti jha