बाधाओं को पार कर सरपट दौड़ लगा रहे दीप
दीप पंडित ने 41 साल पुराना 3000 मीटर स्टीपलचेज का राज्य रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रचा है। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, ...और पढ़ें
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HighLights
दीप पंडित ने 41 साल पुराना स्टीपलचेज रिकॉर्ड तोड़ा।
वेस्ट बंगाल स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रचा इतिहास।
आर्थिक तंगी के बावजूद ओलंपिक स्वर्ण का लक्ष्य।
विशाल श्रेष्ठ, जागरण। इरादे मजबूत हों तो बाधाएं रास्ता रोक नहीं पातीं। 28 साल के दीप पंडित इसकी मिसाल पेश कर रहे हैं। सीमित आर्थिक संसाधनों और खेल की चुनौतियों के बावजूद दीप एथलेटिक्स की दुनिया में सरपट दौड़ लगा रहे हैं। उन्होंने स्टीपलचेज की 3000 मीटर दौड़ में 41 साल पुराना स्टेट रिकार्ड तोड़कर इतिहास रच दिया है। अब उनकी निगाहें देश के लिए ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने पर टिकी हैं।
दीप ने हाल में आयोजित वेस्ट बंगाल स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 3000 मीटर स्टीपलचेज की दूरी 9 मिनट 20.36 सेकेंड में पूरी कर 1985 में पीटी जोसेफ द्वारा बनाए गए 9 मिनट 22.30 सेकेंड के रिकार्ड को ध्वस्त कर दिया। मालूम हो कि स्टीपलचेज एथलेटिक्स की चुनौतीपूर्ण स्पर्धाओं में से एक है। यह लंबी दूरी की बाधा दौड़ होती है, जिसमें धावकों को दौड़ के दौरान निर्धारित बाधाओं और पानी से भरे गड्ढे को पार करना पड़ता है। इसमें केवल रफ्तार नहीं, दमखम, संतुलन, तकनीक और लगातार कड़े अभ्यास की भी जरूरत होती है।
दक्षिण 24 परगना जिले के कैनिंग स्थित मातला पांच नंबर बाजार इलाके के निवासी दीप ने 2018 में दौड़ना शुरू किया था। उनके पिता लखिंदर सिंह बेल्ट बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनकी सीमित आमदनी से परिवार का गुजारा मुश्किल से हो पाता है। मां रामबती पंडित गृहिणी हैं। ऐसे हालात में एथलेटिक्स जैसे खर्चीले खेल को जारी रखना दीप के लिए आसान नहीं हो पाता। आर्थिक तंगी उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है लेकिन उन्होंने इसका भी रास्ता निकाला है।
अपने खेल का खर्च उठाने के लिए वे मैराथन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं। इन प्रतियोगिताओं में मिलने वाली पुरस्कार राशि से अपने प्रशिक्षण और खेल से जुड़ी जरूरतों को पूरा करते हैं। दीप ने अब तक कई मैराथन प्रतियोगिताएं जीती हैं। पिछले वर्ष आयोजित हुए टाटा स्टील कोलकाता मैराथन की 10 किलोमीटर दौड़ में वे अव्वल रहे। जेबीजी कोलकाता मैराथन की पांच किलोमीटर दौड़ के भी वे विजेता रहे।
उधार लेकर खरीदने पड़ते हैं जूते
मूल रूप से बिहार के वैशाली जिले के पानापुर बटेसरनाथ गांव के रहने वाले दीप ने बताया-‘दौड़ने के लिए अच्छे जूतों की जरूरत होती है। हर बार नए जूते खरीदना संभव नहीं हो पाता। जूते खराब होने पर अक्सर उधार लेकर नए जूते खरीदने पड़ते हैं।’ दीप धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहते हैं। राज्य के बाद अब उनकी निगाहें राष्ट्रीय स्तर पर चमक बिखेरने की है, हालांकि उनका अंतिम लक्ष्य ओलंपिक में भारत को स्वर्ण पदक दिलाना है। इसके लिए वे पूरी एकाग्रता के साथ कड़ी मेहनत कर रहे हैं। वे कैनिंग विश्व बैंक एथलेटिक सेंटर में रोजाना पांच घंटे अभ्यास करते हैं।
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