सिलीगुड़ी [जागरण संवाददाता]। नववर्ष 2019 के आने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। हर कोई 2018 की शानदार विदाई और 2019 का गर्मजोशी से स्वागत करने की तैयारी में है। अब भला सिलीगुड़ी के लोग इसमें पीछे कैसे रहेंगे। यहां शहर के आसपास ही प्रकृति की सुंदरता ऐसी है कि देखते रह जाएं। डैम, जंगल, जंगली जानवर, प्रवासी पक्षी, मंदिर, पुराना पुल, नदी का किनारा, चाय के बागान, खिले फूल। और तो और यहां के खुशनुमा मौसम का भी कोई सानी नहीं है। बगल में ही करीब 70 किलोमीटर दूर दार्जीलिंग में लोग ठिठुरे जा रहे हैं और सिलीगुड़ी में बसंती बयार बह रही है। नए साल की शुरुआत मंगलवार से होगी। लिहाजा मंदिर से लेकर जंगल तक मंगल ही मंगल देखने को मिलेगा। 
हिमालय की गोद में स्थित, सिलीगुड़ी एक ऐसा शहर है जो दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी के बीच में स्थित है। पश्चिम बंगाल का दूसरा सबसे बड़ा शहर, पूर्वोत्तर भारत का यह प्रवेश द्वार है, जोकि चाय, लकड़ी, पर्यटन और परिवहन के लिए जाना जाता है। भौगोलिक दृष्टि से एक ओर सिलीगुड़ी नेपाल की सीमा से जुड़ा है और दूसरी ओर बांग्लादेश की सीमा से जुड़ा है। सिलीगुड़ी गलियारा भारत को अपने विभिन्न पूर्वोत्तर राज्यों के साथ जोड़ता हैं। वन्यजीव अभ्यारण्य से चाय बागानों और मठों तक, सिलीगुड़ी पर्यटकों के लिए अंदर काफी कुछ समेटे हुए है।
हालांकि 31 दिसंबर सोमवार दिन होने के कारण अधिकांश कामकाजी लोगों ने रविवार को छुट्टी का फायदा उठाते खरीदारी कर ली है। नववर्ष की पौ फटते ही लोगों के जीवन की नये साल की नई उन्नति का सवेरा होगा। इसलिए अधिकांश लोग नववर्ष की सुबह सवेरे जगकर एक दूसरे को शुभकामना देते हैं। नववर्ष की सुबह से ही लोग मंदिरों में पहुंचकर पूजा पाठ में जुट जाते हैं। युवाओं की टोली जगह-जगह पिकनिक मनाती है। 
नववर्ष के स्वागत के तौर तरीके में काफी बदलाव सा आने लगा है। रात के बारह बजते ही जगह-जगह आतिशबाजी की आवाज के बीच हैप्पी न्यू ईयर की शुभकामना व्हाट्सएप, एसएमएस व मोबाइल से आने लगते हैं।
सिलीगुड़़ी में गुलाबी मौसम के बीच पिकनिक स्पॉट पहुंचकर पिकनिक मनाने की तैयारी चल रही है। नये वर्ष का जश्न मनाने के लिए तीस्ता और महानंदा नदी तट पर युवाओं की टोली अपना-अपना पड़ाव डालने के लिए निरीक्षण करने लगी है। अभी नदी में पानी कम रहने व जगह-जगह बालू और चट्टान पर दिनभर गाजे बाजे के साथ लोग पिकनिक मनाकर पहला दिन बिताते हैं। लिहाजा पहली जनवरी 2019 मंगलवार को किस पिकनिक स्पॉट पर जाकर परिवार के साथ नए साल के पहले दिन को इंज्वॉय करें, योजना बना ली गई है।
आइए जानते हैं यहां के प्रमुख स्थानों को, जहां जाकर आप आराम से साल के पहले दिन कुछ समय बिता सकते हैं।
इस्कॉन मंदिर
जो लोग धार्मिक स्थानों पर और शहर के बीच में ही जाना चाहते हैं, उनके लिए इस्कॉन मंदिर से बेहतर विकल्प नहीं हो सकता। यहां आपको भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के साथ ही तरह-तरह के फूलों को भी देखने का सौभाग्य प्राप्त होगा। यह परिसर इतना बड़ा है कि यहां खिली धूप में बच्चों संग कुछ समय बिता सकते हैं।
सेवक काली मंदिर
यदि आप प्रकृति दर्शन के साथ ही मां काली की पूजा के साथ नए साल की शुरुआत करना चाहते हैं तो शहर से करीब किलोमीटर दूर सेवक रोड पर काली मंदिर जाएं। देवी की पूजा-अर्चना करने के बाद बगल में ही भोलेनाथ का भी दर्शन करें। यहां की ऊंचाई से तीस्ता की खूबसूरती देखते ही बनती है। 
कोरोनेशन ब्रिज
अब यदि मां काली की पूजा करने गए हैं तो चंद कदमों की ही दूरी पर स्थित अंग्रेजों के जमाने के बने कोरोनेशन ब्रिज तक जरूर जाएं। यहां नीचे तीस्ता और उसके दोनों किनारों पर आसमान से बातें करते पहाड़। पहाड़ पूरी तरह से हरे-भरे पेड़ों से ढका हुआ। गजब का दृश्य है। पुल पर खड़े होकर आप सेल्फी भी ले सकते हैं। यहां बंदर कुछ ज्यादा ही हैं, लिहाजा इनसे सावधान रहना पड़ता है। सिलीगुड़ी से आने-जाने के क्रम में रास्ते में होटल मिलेंगे। जहां आपको आपकी पसंद का खाना-नाश्ता मिल जाएगा। परिवार सहित पिकनिक मनाने के लिए रेलवे लाइन के पास नदी के किनारे जा सकते हैं।
गाजोल डैम

शहर से कुछ दूरी पर गाजोलडोबा में डैम है। यहां जा़ड़े में प्रवासी पक्षी काफी संख्या में आते हैं। यहां जाने पर आपको प्रवासी पक्षियों को करीब से देखने का मौका मिलेगा। 
सालूगाड़ा मॉनेस्ट्री
सेवक रोड पर ही बौद्ध धर्म का प्रमुख स्थल सालूगाड़ा मॉनेस्ट्री है। सिलीगुड़ी के बाहरी इलाके में स्थित, सालूगारा मठ ध्यान के लिए स्थानीय और पर्यटकों के बीच खासा प्रसिद्ध है। अपने 100 फुट ऊंचे स्तूप के लिए प्रसिद्ध इस मठ को बौद्ध संन्यासियों द्वारा चलाया जाता है जो दलाई लामा के अनुयायी हैं। यहां दलाई लामा भी के भी पवित्र चरण पड़ चुके हैं।
महानंदा वन्यजीव अभयारण्य 
उत्तर बंगाल का सबसे महत्वपूर्ण और लोकप्रिय अभयारण्य महानंद वन्यजीव अभयारण्य, तीस्ता और महानंदा नदियों के बीच, हिमालय की तलहटी पर स्थित है। दार्जिलिंग वन्यजीव विभाजन के अंतर्गत महानंदा वन्यजीव अभयारण्य 159 वर्ग किमी आरक्षित जंगल में फैला हुआ है और 1955 में एक खेल अभयारण्य के रूप में शुरू किया गया था। इस वन्यजीव अभयारण्य में हाथियों की भारी आबादी के अलावा अद्भुत खूबसूरत ट्रेल्स को देखा जा सकता है। इस के लिए आप यहां रंग बिरंगे पक्षियों की प्रजातियों को भी निहार सकते हैं। यह हिमालय की तलहटी में कैम्पिंग लगाकर ठंड़ी और अलाव के ऊपर चलती शुद्ध हवा का आनंद लेने के लिए एक सही स्थान है।उत्तर बंगला विज्ञान भवन 
यह अद्भुत विज्ञान केंद्र एक आम आदमी के जीवन में विज्ञान को प्रेरित करने के लिए काम करता है ताकि समाज के विकास को सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक प्रगति के लाभ उनके पास पहुंच सकें। यह विज्ञान नगरी आपको शानदार तरीके से प्रदर्शित तारामंड़ल में ले जाता है और यहां देखने के लिए प्रकृति व्याख्या केंद्र भी है। यह मज़ा सह शैक्षिक सैर के लिए सही स्थान है और बच्चों के साथ सैर करने आए पर्यटकों के लिए यह बेहद खास है।
बंगाल जंगल सफारी

सेवक रोड पर ही बंगाल जंगल सफारी पार्क है। प्रकृति की गोद में यहां आपका समय कब कट जाएगा, पता ही नहीं चलेगा। यहां बस से जंगल की सैर कराई जाती है। इस दौरान आपको तमाम जंगली जानवर देखने को मिलेंगे। इसका शुल्क लगता है। 
चाय बागान

दार्जीलिंग रोड तथा अररिया रोड पर कुछ दूर ही आगे बढ़ने पर आपको सड़़क के दोनों ओर चाय बागान देखने को मिलेंगे। इन बागानों की खूबसूरती देखकर आप वहां फोटो सेशन से खुद को रोक ही नहीं पाएंगे। 
ध्यान देने वाली बात
ध्यान देने वाली बात यह है कि शराब का सेवन नए वर्ष के पहले दिन के पिकनिक को खराब कर सकता है। लिहाजा यदि आप ठीक से इस दिन को इंज्वॉय करना चाहते हैं तो शराब की ओर देखें भी मत, पीने की तो बात ही दूर है। शराबियों के निपटने के लिए पुलिस ने भी पूरी तैयारी की है। प्रमुख पिकनिक स्थलों पर पुलिस के जवान वर्दी में और बिना वर्दी में भी तैनात रहेंगे। यदि आपने हुड़दंग किया तो नए वर्ष की पहली रात थाने की हाजत में बितानी पड़ सकती है। 

 

Posted By: Rajesh Patel

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