-भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के नीतियों पर उठाएं जा रहे सवाल

-बड़े नेताओं के संदेश को उनतक पहुंचाने की हो रही कोशिश

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : विधानसभा चुनाव 2021 के लिए माकपा ने जनसंपर्क अभियान के बाद बिग्रेड समावेश को अपने कार्यकर्ता तक पहुंचाने के लिए रविवार को सभी प्रकार की तैयारी की है। भाजपा के तर्ज पर वहां से सीधा प्रसारण कर रही है। कंाग्रेस और माकपा हर हाल में दार्जिलिंग व डाबग्राम फूलबाड़ी में पार्टी को विजयी बनाना चाहती है। माकपा अपने सहयोगी दलों के साथ लगातार जनसंपर्क अभियान भी पूरा कर लिया है। माकपा नेता जीवेश सरकार और नगर निगम के निवर्तमान चेयरमैन दिलीप सिंह ने कहा कि लोगों के भावनाओं के साथ भाजपा और तृणमूल कांग्रेस छल कर रही है। भाजपा जिस प्रकार लगातार किसान और श्रमिक विरोधी कानून ला रही है उससे असंतोष है। स्वास्थ्य बीमा के नाम पर लोगों को लाइन में खड़ा कर दिया गया है। जिसके पास यह कार्ड है भी उसे नर्सिग होम में प्रवेश तक नहीं करने दिया जाता है।

नहीं मिल रहा लोगों को राशन, व्यापक पैमाने पर घोटाला

राज्य सरकार पर हमलावर होते हुए कहा कि खाद्य सुरक्षा योजना के तहत जिले में गरीबों को दिया जाने वाला राशन पात्रता सूची के फेर में उलझाकर रखा है। योजना लागू होने के दो वर्ष से भी अधिक समय गुजर गया परंतु अब तक पात्र गृहस्थियों की सूची दुरुस्त नहीं हो पाई है। जो सूची पूरा होने के बाद भी डिजीटल कार्ड बने भी है उसमें 50 प्रतिशत लोगों के नाम ही नहीं है। योजना के तहत सरकार ने गेहूं व चावल खाद्यान्न को बेहद सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने का फैसला लिया था जो सभी लोगों को नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी के इशारे पर ही यह सब कुचक्र रचा जा रहा है। खाद्य आपूर्ति विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि आज राज्य में अप्रवासी मजदूरों के लिए जो राशन आया उसका क्या हुआ। करोड़ों रुपये के राशन लूट हुए है। अभी धान पूरी तरह निकला ही नहीं कि भ्रष्ट अधिकारियों के इशारे पर बड़े पैमाने पर धान की खरीदारी भी शुरू हो गयी है। जो चर्चाएं और समाचार पत्रों में सामने आ रही है उसके अनुसार प्रत्येक क्विंटल में 150 रुपये की राशि ली जा रही है। क्या इसकी जांच कराएगी सरकार। सच सामने आ जाएगा।

नहीं मिला जमीन का पट्टा

कल तक मां माटी मानुष की बात करने वाली परिवर्तन की टीएमसी सरकार का वास्तविक चेहरा अब लोगों के सामने आने लगा है। लोग बदलाव चाहते है। दस वर्षो में राज्य सरकार लोगों को जमीन का पट्टा मुहैया नहीं करा पायी है। प्रत्येक चुनाव के पूर्व जमीन का पट्टा देने की बात करती है। लेकिन वास्तविकता यह है कि उसको लेकर भी राजनीति की जा रही है। वाममोर्चा के शासनकाल में सरकार ने जमीन के कागजात एक रुपये सालाना के दर पर 99 वर्ष का लीज देकर कागज देना शुरु किया था। उसे इस सरकार ने बंद कर दिया। अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र नहीं मिल रहा है। सदाचार की बात करने वाली सरकार का दोहरा चरित्र चिटफंड, अम्फन तुफान और कोरोना काल में सामने आया है। सरकार में अगर हिम्मत है कि उत्तर बंगाल में मची लूट की निष्पक्ष जांच कराए।

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