कोलकाता] राज्य ब्यूरो।  कोरोना वायरस संक्रमण से बंगाल में हुई मौत के आंकड़ों पर उठते सवालों के बीच राज्य के मुख्य सचिव राजीव सिन्हा ने शनिवार को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस संक्रामक बीमारी के संबंध में कोई भी तथ्य या आंकड़ा छिपाने का प्रयास नहीं कर रही है।

उन्होंने कहा कि संक्रमित व्यक्तियों के यात्रा विवरण तलाशने की बजाय मीडिया को ममता बनर्जी सरकार द्वारा महामारी से लड़ने के लिए उठाए गए कदमों को दिखाना चाहिए। 

इस सप्ताह की शुरुआत में कोरोना से मरने वालों की संख्या पर वरिष्ठ अधिकारियों ने असहमति जताई थी। राज्य सरकार द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों की एक समिति ने गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया था कि राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण से सात लोगों की मौत हुई है। इसके कुछ घंटों बाद सिन्हा ने कहा था कि इस बीमारी से केवल तीन लोगों की मौत हुई है और यह पता नहीं चल पाया है कि बाकी चार की मौत कोविड-19 से हुई थी या नहीं।

राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने उसी दिन अलग आंकड़ा प्रस्तुत किया था। इसके बाद राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने बुलेटिन प्रकाशित करना बंद कर दिया था जिसके बाद अटकलें लगाई जा रही हैं कि सरकार सूचना को दबाने का प्रयास कर रही है।

हालांकि सिन्हा ने कहा है कि आगे से बुलेटिन नियमित रूप से जारी किया जाएगा। पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने शुक्रवार को राज्य सरकार पर महामारी से होने वाली मौतों का आंकड़ा छिपाने का आरोप लगाया था। 

कोरोना संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 अप्रैल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस के सांसद हिस्सा नहीं लेंगे। इसको लेकर बंगाल में एक बार फिर सियासत गरमा गई है।

प्रदेश भाजपा के नेताओं ने इसको लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल की तीखी आलोचना की है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व सांसद दिलीप घोष ने कहा कि कोरोना महामारी को लेकर जब पीएम सभी दलों के साथ चर्चा करना चाहते हैं, ऐसे समय में भी तृणमूल राजनीति करने से बाज नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि पहले भी कई मौकों पर तृणमूल ने केंद्र व पीएम द्वारा बुलाई गई बैठक में हिस्सा नहीं लिया है, लेकिन इस समय वह जो कर रही है वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

Posted By: Preeti jha

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