-प्री वेडिंग शूट का भी लगातार बढ़ रहा है क्रेज

-इस्लामपुर मारवाड़ी समाज ने उठाया बड़ा कदम

-सिलीगुड़ी में भी प्रतिबंध लगाने की उठी मांग

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : विवाह को एक पवित्र बंधन माना जाता है। इसमें सिर्फ एक लड़का-लड़की का विवाह नहीं बल्कि दो परिवारों के बीच मिलन भी होता है। अग्नि जिसे देवताओं का मुख माना जाता है, उसके सामने फेरे लिए जाते हैं। यह अत्यंत पवित्र बंधन है औ इसमें किसी आडंबर की आवश्यकता नहीं है। लेकिन अब परिस्थियां लगातार बदल रही है। शादी ब्याह में दिखावे के होड़ में आडंबर बढ़ता जा रहा है। शादी के पहले प्री वेडिंग शूट और बैचलर पार्टी, कॉकटेल पार्टी का आयोजन करना एक स्टेट्स सिंबल बन चुका है। जो भारतीय संस्कृति के विरुद्ध है। किंतु समाज के लिए बुराई है प्री वेडिंग शूट और बैचलर पार्टी। इसे एक सामाजिक बुराई माना जाने लगा है। क्योंकि बैचलर पार्टी और प्री वेडिंग शूट की आड़ में शराब का अड्डा जमता है। इसमें लाखों रुपये फूंक दिए जाते हैं। खास कर मारवाड़ी समाज में प्री वेडिंग शूट और बैचलर पार्टी का विरोध होना शुरू हो गया है। मारवाड़ी समाज, इस्लामपुर ने तो प्री वेडिंग शूट और बैचलर पार्टी पर रोक लगा दी है। इस्लामपुर में लगभग 250 मारवाड़ी परिवार बसते हैं। उनका कहना है कि ये सब पाश्चात्य संस्कृति की देन है। भारतीय संस्कृति में यह नहीं है। यहां प्री वेडिंग शूट या फिर बैचलर पार्टी की कोई आवश्यकता नहीं है। भविष्य में इसके दुष्परिणाम सामने आएंगे। इसलिए पहले ही इस पर रोक लगा दी गई है। वहीं दबी जुबान में कुछ लोगों का कहना है कि प्री वेडिंग शूट पर एक लड़का-लड़की का फोटो सेशन कराना कतई सही नहीं है। अगर ऐसे में परिवार वाले इनके साथ ना जाएं तो बहुत कुछ गलत हो सकता है। ऐसी कई घटनाएं सुनने को मिलती है जहां पर लड़का-लड़की विवाह के पहले ऐसा कर बैठते है जो जायज नहीं है। बाद में किसी कारण से शादी नहीं पाई तो दोनों ही परिवारों को शर्मिदगी उठानी पड़ती है। दोनों ही परिवार समाज के डर से कुछ नहीं कह पाते है। कई बार इसके दुष्परिणाम परिवार वालों को झेलरी पड़ती है। वहीं बैचलर पाटी में शराब, जुआ खेला जाता है। जहां पर लड़के-लड़कियां एक दूसरे के साथ नाचते-गाते हैं और शराब पीते हैं। हालात ऐसे हो जाते है कि नशे में बेसुध युवक-युवतियों को परिवारवालों के द्वारा उनके घर तक छोड़कर आना पड़ता है। बैचलर पार्टी ने सिलीगुड़ी में में भी समाज में लोगों की नींद उड़ा दी है। इस पर रोक लगाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। सिलीगुड़ी में समाज से जुड़े कुछ लोगों इस प्रकार की परंपरा पर अपनी चिंता प्रकट की है। उनका कहना है कि हम इस प्रकार की परंपरा पर रोक लगाना चाहते हैं किंतु इसकी जड़ें इतनी फैल चुकी है कि इस पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाने पड़ेंगे। ये एक मीठा जहर है। जिसे परिवारवालों को समझने की आवश्यकता है।

शादी के पहले प्री वेडिंग शूट और बैचलर पार्टी पर एकदम रोक लगनी चाहिए। हम अपनी बेटी के लिए एक ऐसा वर खोजते हैं जो शराब नहीं पीता है। फिर लड़के के विवाह में बैचलर पार्टी का आयोजन कर हम समाज को क्या संदेश दे रहे हैं, ये सोचनीय विषय है। प्री वेडिंग शूट भी कतई सही नहीं है। एक कुंवारा लड़का-लड़की का प्री वेडिंग शूट करवाना बिल्कुल गलत है। इसके लिए समाज को एकजुट होने की आवश्यकता है।

-प्रवीण झंवर ,अध्यक्ष, महेश्वरी सेवा ट्रस्ट प्री वेडिंग शूट और बैचलर पार्टी पर रोक लगनी चाहिए। ये भारतीय संस्कृति के बिल्कुल विरूद्ध है। इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। अगर कोई आवाज भी उठाना चाहे तो समाज के दस लोग खड़े होकर इसका विरोध शुरू कर देते हैं। ऐसे में समाज सुधार की आवश्यकता है।

- बजरंग सेठिया,उत्तर बंगाल प्रभारी, जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा

हम इस तरह की संस्कृति का बिल्कुल विरोध करते हैं। विवाह के पहले प्री वेडिंग शूट और बैचलर पार्टी का कोई औचित्य नहीं है। इसके लिए मारवाड़ी समाज को एकजुट होने की आवश्यकता है। तभी इस प्रकार की कुरीतियों पर रोक लग पाएगी।

-किशन बापोड़िया,पूर्व अध्यक्ष, उत्तर बंग मारवाड़ी सेवा ट्रस्ट, सिलीगुड़ी पहले के दौर में जब प्री वेडिंग शूट और बैचलर पार्टी नहीं होती थी तब भी विवाह सफल होता था। ये एक ढकोसला है। एक लड़का-लड़की का विवाह से पहले प्री वेडिग शूट करना कतई सही नहीं है। वहीं बैचलर पाटीं में शराब का दौर चलता है। समाज के सभी लोग यह जानते हैं,किंतु विरोध नहीं करते हैं। इस पर तुरंत रोक लगाने की आवश्यकता है।

- अशोक अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष, हिलकार्ट रोड व्यवसायी समिति

प्री वेडिंग शूट और बैचलर पार्टी भारतीय संस्कृति के बिल्कुल विरूद्ध है। जब हमारे बेटे-बेटियों का प्री वेडिंग शूट कर पर्दे पर दिखाया जाता है तो हम बड़े क्या करे और क्या ना करें की उहापोह में उलझ जाते हैं। वहीं बैचलर पार्टी में क्या-क्या होता है इससे कोई अनजान नहीं है। पिछले एक वर्ष से हम इसे बंद कराने के लिए प्रयासरत थे। जिसमें दामोदर अग्रवाल की भी सक्रिय भूमिका रही। अग्रवाल, जैन, महेश्वरी सहित अन्य मारवाड़ी समाज ने अलग-अलग बैठकें की । सभी ने सर्वसम्मति से इसे बंद करने का निर्णय लिया और इस पर रोक लगा दी गई।

-ओमप्रकाश बाहेती,इस्लामपुर मारवाड़ी समाज

Posted By: Jagran

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