-डॉक्टरों व पर्यावरण संरक्षकों ने उठाया सवाल

-पुलिस कमिश्नर को सौंपा जाएगा ज्ञापन

-सभी प्रकार के पटाखों पर प्रतिबंध की मांग 30

फीसद कम बारूद वाले पटाखे ग्रीन क्रैकर

1.2

फीसद है देश में कोविड से मृत्यु दर

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घंटे तक ग्रीन पटाखे जलाने की मिली है छूट जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी: दीपावली में ग्रीन क्रैकर यानी प्रकृति सम्मत पटाखे बजाने की अनुमति देने पर पर्यावरणविदें व डॉक्टरों ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि भारत जैसे देश में यह तय करना काफी कठिन है कि ग्रीन क्रैकर व गैर ग्रीन क्रैकर में अंतर क्या है। जहां तक उनकी जानकारी है कि 30 प्रतिशत कम बारूद वाले पटाखों को ग्रीन क्रैकर की श्रेणी में रखा जाता है। लेकिन यह तय कौन करेगा। इसे देखने की जिम्मेवारी किसकी होगी। कोविड के बाद लोग गंभीर रूप से दूसरी बीमारियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में यह कहां तक जायज है। गुरूवार को हिलकार्ट रोड स्थित हिमालयन नेचर एंड एडवेंचर फाउंडेशन के कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन में उक्त बात कही गयी। हिमालयन नेचर एंड एडवेंचर फाउंडेशन, माई डॉक्टर्स, सूर्य नगर समाज कल्याण संस्था, कोरोना फाइटर्स जैसे संगठनों ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशिका पर सीधे-सीधे सवाल किए हैं। इनलोगों ने सभी प्रकार के पटाखों पर बैन की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारत में सीएसआईआर व एनईईआरआई सिर्फ दो विश्वसनीय मार्का हैं, जो ग्रीन क्रैकर को प्रमाणित करते हैं, लेकिन भारत जैसे देश में जो ढाचागत स्थिति है इसे देखने वाला कौन है। वक्ताओं ने कहा कि वह इस विषय को लेकर 29 अक्टूबर को सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर से मिलेंगे तथा उन्हें इस बारे में ज्ञापन सौंपेंगे, क्योंकि वर्तमान हालात में ग्रीन क्रैकर के नाम पर आतिशबाजी करना मानवता के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। नेचर एंड एडवेंचर फाउंडेशन के संयोजक अनिमेष बोस, माई डॉक्टर्स की ओर से डॉक्टर संदीप सेनगुप्ता, डॉक्टर कल्याण खान, डॉक्टर प्रिंस पारेख, डॉक्टर अनिर्वान व सूर्यनगर समाज कल्याण संस्था की ओर से नरेन बरारी का कहना था कि वर्तमान समय में स्थिति बहुत खराब है। कोविड के मरीजों की हालत अब भी नाजुक है। ग्रीन क्रैकर से निकलने वाले धुंए से उनका दम घुट जायेगा। बहुत से ऐसे लोग हैं जो कोरोना से उबरने के बाद दूसरी तरह की बीमारियों से जूझ रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए प्रदूषण जानलेवा साबित होगा। सिर्फ तीस फीसद को ही डबल डोज

वक्ताओं ने कहा कि भारत में 100 करोड़ कोविड वैक्सीन के डोज दिए जाने को लेकर जश्न मनाया जा रहा है, जबकि जश्न मनाने जैसी कोई बात नहीं है। भारत में अभी भी 30 प्रतिशत लोगों का ही टीकाकरण हो पाया है। यानी दोनों डोज लेने वालों की संख्या सिर्फ तीस फीसद है। इतना ही नहीं दुनिया के दूसरे देशों में कोविड से मृत्यु दर .2 प्रतिशत है, वहीं भारत में कोविड के कारण मृत्यु का दर 1.2 प्रतिशत है। विगत 24 घटे में 750 लोगों की मौत हुई है। बंगाल में 3.7 प्रतिशत की दर से पॉजिटिविटी रेट है, जबकि दार्जिलिंग जिले में 7.3 की दर से पॉजिटिविटी रेट है ऐसे में लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है। ग्रीन क्रैकर सिर्फ बोलने से नहीं होगा ग्रीन क्रैकर की परिभाषा स्पष्ट करनी होगी। बताना होगा कि इसमें किस तरह के पटाखे आएंगे। क्योंकि उन्हें जहा तक मालूम है इसमें बारूद की मात्रा अन्य की तुलना में 30 प्रतिशत कम होती है।

अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता

ठंड के चलते बच्चे, बूढ़े व कोविड मरीजों में निमोनिया, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी, अस्थमा जैसी समस्या दिख रही है ऐसे में प्रशासन को स्थिति साफ करनी होगी। दीपावली प्रकाश का उत्सव है। यह धुंआ का उत्सव नहीं है इसे प्रकाश का पर्व बनाकर रखा जाए। पिछली बार कम पटाखे बजाए गए थे तो लोगों ने राहत की सास ली थी लेकिन इस बार ग्रीन क्रैकर के नाम पर कुछ चीजों को बढ़ावा देने का प्रयास हुआ है, जो सही नहीं है। स्कूल और कॉलेज खोलने की घोषणा हो चुकी है इसलिए हमें और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। क्या है गाइड लाइन

बताते चले कि पश्चिम बंगाल पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने पटाखों को लेकर गाइड लाइन जारी किया है। इसके मुताबिक सिर्फ ग्रीन क्रैकर ही बजाये जायेंगे और दीपावली के दिन रात के 8 बजे से 10 बजे तक इसे बजाने की छूट होगी। वहीं क्रिसमस व नये साल पर रात के समय 1 घंटे के लिए ग्रीन क्रैकर बजाने की अनुमति दी गयी है। लेकिन ग्रीन क्रैकर को लेकर भी सवाल भी उठने लगे हैं।

Edited By: Jagran