-जगह-जगह उफनती नदियों की तेज धार के कटाव में बह गई चाय बागानों की जमीन

- नदियों के तटबंध सुदृढ़ करने और जल प्लावन व मृदा क्षरण की रोकथाम के उपाय किए जाने की माग जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : शहर व आसपास समेत पूरे उत्तर बंगाल में बीते कई दिनों से जारी भारी बारिश के चलते यहा चाय उद्योग को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसे लेकर तराई ब्राच इंडियन टी एसोसिएशन की ओर से दाíजलिंग के जिलाधिकारी को पत्र भी लिखा गया है। इसके द्वारा कहा गया है कि फूलबाड़ी टी इस्टेट में लगभग ढाई हेक्टेयर चाय बागान और डेढ़ हेक्टेयर आवासीय क्षेत्र बारिश, बाढ़ व नदियों के जल प्लावन से बर्बाद हो गए हैं। वहीं, सतीशचंद्र टी इस्टेट में भी 10,000 से ज्यादा चाय की झाड़िया समाप्त हो गई हैं। कमलापुर टी इस्टेट की काफी जमीन हुलिया नदी के प्लावित जल से कटाव की शिकार हो गई है। ऑर्ड तराई टी इस्टेट, न्यू चुमटा टी इस्टेट, मेरी व्यू टी इस्टेट, व अन्य कई चाय बागानों की अवस्था अत्यंत ही दयनीय हो गई है। इन चाय बागानों की जहा बहुत सारी जमीन नदियों में समा गई है। वहीं, फसलों व आवासीय क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

यह भी कहा गया है कि एक तो पहले से ही कोरोना संकट व लॉकडाउन संकट के चलते चाय बागान व चाय उद्योग प्रतिकूल परिस्थिति झेलने को मजबूर थे अब ऊपर से बारिश व बाढ़ ने और भी रही सही कसर निकाल दी है। एसोसिएशन के सचिव राणा दे ने माग की है कि चाय बागानों को बचाने हेतु नदियों का तटबंध सुदृढ़ किया जाए। जल प्लावन व मृदा क्षरण की रोकथाम के उपाय किए जाएं।

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