संवाद सूत्र, दिनहाटा : गैलेंट 101 वीं वाहिनी की सीमा पर सोमवार को धरला गांव के सामने जीरो लाइन पर धूमधाम से मां छिन्न मस्ता की पूजा-अर्चना की गयी। चार हजार 743 लोगों ने मां की पूजा की।

सीमा सुरक्षा बल के आशीष बेहरा ने बताया कि सन 1971 में हिंदुस्तान की तथा पूर्वी पाकिस्तान के युद्ध के बाद जब बांग्लदेश का गठन हुआ, तोब गार्वडंका नदी के किनारे ग्रामीण इलाके के लोगों ने जीरो लाइन सीमा स्तंभ संख्या 965/ फाइव एस के नजदीक श्मसान घाट तैयार करके हिंदू रीति-रिवाज के साथ क्रिया कर्म करने गले। 1978 में इस क्षेत्र में बारिश नहीं होने के कारण भीषण अकला पड़ा, जिसके कारण यहां से ग्रामीण पलायन करने लगे, उस समय एक ग्रामीण जितन भट्टाचार्य ने नदी के किनारे तांत्रिक साधना करने लगी। इसके कारण इलाके में बारिश हुई। खुशीहाली लौटी। इसके बाद प्रत्येक भद्र मास के की अमावस्या को मां छिन्न मस्ता की पूजा की जाती है। वर्तमान में जितन भट्टाचार्य के शिष्य सुनिल भट्टाचार्य तांत्रिक साधना करते है।

कैप्शन : मां छिन्नमस्ता

Posted By: Jagran