कद्दू में कैलोरी, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, फाइबर, सोडियम, फोलेट और विटामिन जैसे पोषक पाए जाते हैं।
कद्दू खाने में बेहद स्वादिष्ट होता है। यह आपको लंबे समय तक सेहतमंद भी रखता है, जो खरबूजा और तरबूज फलों की प्रजाति का ही सदस्य है।
हिंदू धर्म शास्त्र के मुताबिक कद्दू से जुड़ी कई ऐसी मान्यताएं और परंपराएं है, जिसका पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है।
इन्हीं मान्यताओं में से एक मान्यता यह भी है कि छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों की आदिवासी महिलाएं आज भी साबुत कद्दू नहीं काटती।
ऐसे में आज हम आपको यही बताएंगे कि आखिर इसके पीछे की क्या वजह है? आइए इसके बारे में विस्तार से जानें।
आदिवासी महिलाओं के अनुसार कद्दू को बड़ा या ज्येष्ठ पुत्र माना जाता है। ऐसे में इसे साबुत काटना बड़े बेटे की बलि देने के समान होता है।
जब इन घरों में कद्दू की सब्जी बनाई जाती है, तो पहले पुरुष इसे काटते हैं, फिर महिलाएं बाद में इसके छोटे-छोटे टुकड़े करती हैं।
कद्दू से जुड़ी यह मान्यता बेहद ही रोचक है। अध्यात्म से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहें jagran.com