राज कपूर को यूं ही शोमैन नहीं कहा जाता। उनकी एक्टिंग और डायरेक्टिंग का जादू हर किसी को आकर्षित करता था। उनकी फिल्म 'मेरा नाम जोकर' एक ऐसा ड्रीम प्रोजेक्ट थी, जो हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्मों में से एक बन गई।
मेरा नाम जोकर को बनाने में पूरे 6 साल लगे। इसकी वजह फिल्म की बड़ी स्टारकास्ट थी। मनोज कुमार, धर्मेंद्र, सिमी ग्रेवाल और कई बड़े सितारों का टाइम मैच करना उस दौर में बहुत मुश्किल था।
यह फिल्म राज कपूर के दिल के बेहद करीब थी। उन्होंने इसमें 'राजू' का किरदार निभाया, जबकि उनके बचपन का रोल ऋषि कपूर ने किया। कहानी, डायरेक्शन और हर चीज में राज कपूर ने अपनी जान लगा दी।
मेरा नाम जोकर को पूरा करने के लिए राज कपूर ने अपना घर और प्रॉपर्टी तक गिरवी रख दिया था। यह फिल्म उनके लिए सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि जुनून बन चुकी थी।
फिल्म 1970 में रिलीज हुई और बुरी तरह फ्लॉप हो गई। दर्शकों ने इसे उस समय पसंद नहीं किया। राज कपूर इससे बहुत दुखी हुए और खुद को सबसे दूर कर लिया।
कई लोगों ने फिल्म की लंबाई और डबल इंटरवल को असफलता की वजह बताया। लेकिन रणधीर कपूर ने कहा कि उस दौर में यह फिल्म लोगों की सोच से आगे थी, जिसे दर्शक समझ नहीं पाए।
फिल्म की असफलता ने राज कपूर को कर्ज में डुबो दिया। उनके लिए यह समय बहुत कठिन था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
एक साल के बाद राज कपूर ने बॉबी बनाई। ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया की यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई और राज कपूर की किस्मत फिर से चमक उठी।
आज मेरा नाम जोकर हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन फिल्मों में गिनी जाती है। इस तरह की खबरों को पढ़ने के लिए jagran.com पर क्लिक करें।