अक्सर लोग बांके बिहारी के दर्शन के लिए वृंदावन जाते हैं। इस मंदिर का निर्माण स्वामी हरिदास के वंशजों ने साल 1921 में कराया था।
बांके बिहारी को भगवान कृष्ण का बाल स्वरूप माना जाता है। इस मंदिर में कई ऐसे रहस्य हैं, जिसे लोगों के जानना चाहिए। यहां पर घंटी बजाना भी वर्जित है।
इस मंदिर में बांके बिहारी के हाथों में बांसुरी नहीं है। इसके लिए पीछे भी कई रहस्य हैं। वहीं, श्रीकृष्ण हमेशा बांसुरी बजाते रहते हैं।
भक्तों का मानना है कि बांके बिहारी के हाथ कोमल हैं। ऐसे में उनके हाथ में बांसुरी देने से चोट लगने का डर रहता है। इसीलिए, बांके बिहारी के हाथ में बांसुरी नहीं होती है।
बांके बिहारी को शरद पूर्णिमा के दिन बांसुरी दी जाती है। वहीं, बांके बिहारी के सामने पर्दा भी लगाया गया है। इसके पीछे भी रहस्य है।
बांके बिहारी की पूजा छोटे बच्चे के रूप में की जाती है। ऐसे में मंदिर में घंटियां नहीं बजाई जाती है। क्योंकि, घंटी बजाने से बांके बिहारी को डर लग सकता है।
घर पर बांके बिहारी की पूजा करते समय माखन-मिश्री, केसर, चंदन और गुलाब जल चढ़ाना चाहिए। इससे बांके बिहारी प्रसन्न होते हैं और भक्त को आशीर्वाद देते हैं।
बांके बिहारी के दर्शन करने से व्यक्ति के जीवन में खुशहाली आने लगती है। इसके साथ ही, कार्य में आ रही रुकावट दूर होने लगती है और सफलता मिलती है।
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