आपने फ्लाइट से जुड़े कई फैक्ट सुने होंगे। फ्लाइट के उड़ने के मैकेनिज्म से फ्लाइट से जुड़े नियमों तक काफी जानकारी दी जाती है।
लेकिन क्या आप जानते हैं एक टाइम ऐसा भी आता है, जब हवाई जहाज के इंजन में मुर्गे फेंके जाते हैं?
एरोप्लेन के इंजन को टेस्ट करने के लिए मुर्गे फेंके जाते हैं। ये टेस्ट पक्षी के एयरप्लेन से टकराने को लेकर किया जाता है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक किसी भी विमान पर पक्षी से होने वाले हमले को लेकर टेस्ट करने के लिए यह परीक्षण किया जाता है, जो अनिवार्य होता है।
ये टेस्ट खास तरह की बर्ड गन या बर्ड कैनन से किया जाता है। इसमें कई सारे चिकन होते हैं।
इसके जरिए फ्लाइट के इंजन में पक्षियों के भिड़ने की तरह ही इसमें चिकन फायर किए जाते हैं।
इसमें देखा जाता है कि ये इंजन उस स्थिति का सामना कर पाएगा या नहीं। जो कि विंड शील्ड और इंजन दोनों में किया जाता है।
सबसे पहले 1950 के दशक में हर्टफोर्डशायर के डे हैविलैंड एयरक्राफ्ट में ऐसा किया गया था।
इस प्रोसेस में मरी हुई मुर्गियों को काम में लिया जाता है और देखा जाता है कि इंजन में आग तो नहीं लग रही है।