मिर्गी एक ऐसी बीमारी है जो किसी को भी हो सकती है, आमतौर पर बच्चे और युवा इस बीमारी से ज्यादा प्रभावित पाए जाते हैं।
यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें पीड़ित को दौरे पड़ते हैं, ये दौरे अक्सर मामूली होते हैं लेकिन कई बार ये गंभीर रूप भी ले लेते हैं।
दवाओं की मदद से इस बीमारी पर काफी हद तक काबू किया जाता है, मिर्गी के प्रति लोगों में जागरुकता पैदा करने के लिए हर साल 17 नवंबर को राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाता है।
मिर्गी नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती है, इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को नर्वस सिस्टम की गतिविधि में रुकावट के कारण दौरे पड़ते हैं।
इस रोग को एंटी-सीजर दवाओं की मदद से नियंत्रित किया जाता है लेकिन जब दवाएं भी बेअसर हो जाती हैं तो केवल सर्जरी ही एकमात्र उपाय बचता है।
दिमाग पर किसी प्रकार की चोट लगने या चोट का निशान छूट जाने से भी लोग इस रोग से पीड़ित हो सकते हैं।
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार पुरानी बीमारी, तेज बुखार या हृदय रोग के रोगी को भी मिर्गी होने की संभावना होती है, इसके अलावा यह अनुवांशिक कारणों से भी हो सकता है।
मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति को आमतौर झटके लगते हैं और व्यक्ति बेहोश हो जाता है, इसके अलावा अचानक खड़े-खड़े गिर जाना, बिना किसी कारण के अचानक गुस्सा आना आदि लक्षण होते हैं।