सिर्फ एक साड़ी में माता सीता ने कैसे बिताया पूरा वनवास?


By Lakshita Negi21, Dec 2024 11:09 AMjagran.com

श्रीरामचरितमानस और रामायण

श्रीरामचरितमानस और रामायण हिंदू धर्म के महान ग्रंथ है, जहां श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान और उनके जीवन यात्रा के बारे में बताया गया है। इसमें वनवास की कहानी सबसे खास है।

वनवास की शुरुआत

जब भगवान राम को 14 वर्षों के वनवास का आदेश मिला, तो माता सीता और लक्ष्मण ने भी उनके साथ जाने के लिए कहा। उनकी यह यात्रा त्याग, प्रेम और समर्पण की एक मिसाल है।

ऋषि अत्रि के आश्रम की यात्रा

वनवास के दौरान राम, सीता और लक्ष्मण ऋषि अत्रि के आश्रम पहुंचे। वहां ऋषि अत्रि और उनकी पत्नी माता अनसूया ने उनका आदर-सत्कार से स्वागत किया।

माता अनसूया का सतीत्व ज्ञान

माता अनसूया ने सीता जी को पतिव्रता धर्म और सतीत्व का ज्ञान दिया। उन्होंने बताया कि कैसे एक नारी अपने धर्म का पालन करते हुए जीवन में दृढ़ रह सकती है।

माता अनसूया का खास उपहार

माता अनसूया ने सीता जी को पीले रंग की एक दिव्य साड़ी भेंट की। यह साड़ी केवल एक कपड़ा नहीं थी, बल्कि उसमें कई विशेष गुण भी थे।

सीता मां की साड़ी की विशेषता

यह दिव्य साड़ी न तो कभी मैली होती थी और न ही इसे कोई नुकसान पहुंचा सकता था। इसे पहनने के बाद भी यह हमेशा नई जैसी बनी रहती थी।

वनवास में सीता जी के कपड़े

पूरे वनवास के दौरान माता सीता ने इसी साड़ी को पहन रखा था। यह उनके त्याग और सादगी का प्रतीक बन गई।

माता सीता की साड़ी का महत्व

यह साड़ी न केवल माता सीता के लिए खास थी, बल्कि उनके जीवन में आने वाले कठिन समय में उन्हें शक्ति और धैर्य प्रदान करती थी।

माता सीता की यह साड़ी हमें जीवन में त्याग, सादगी और कर्तव्य के महत्व को समझाती है। इस तरह की खबरों को पढ़ने के लिए jagran.com पर क्लिक करें।