उत्तरकाशी : मकर संक्रांति के पावन पर्व का पुण्य काल मंगलवार की सुबह अमृत बेला से शुरू हो रहा है। लेकिन, कई श्रद्धालुओं ने सोमवार सुबह तथा दोपहर को भी भागीरथी में देव डोलियों के साथ आस्था की डुबकी लगाई। इस दौरान घाटों से जुड़े बाजारों में भी खासी रौनक रही है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेश चन्द्र भट्ट शास्त्री ने बताया कि सोमवार की शाम 7.28 बजे सूर्य ने मकर राशि में प्रवेश किया है। सूर्य संक्रमण काल सूर्य अस्त होने के कारण यह पर्व 15 जनवरी की सुबह अमृत बेला से मनाया जाएगा। मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान का खास महत्व है। यह स्नान देवताओं का स्नान का पर्व है। इस मकर संक्रांति को सूर्य भगवान उत्तरायन की ओर बढ़ता है। इसी लिए इस पर्व को उत्तरायणी पर्व भी कहते है। सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और प्राणी मात्र को एक ऊर्जा प्रदान करता है। इस दिन से ऋतु में परिवर्तन होने तथा बसंत के आगमन का आगाज भी हो जाता है।

Posted By: Jagran

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