संवाद सहयोगी, उत्तरकाशी :

सीमांतवर्ती जिला अस्पताल उत्तरकाशी में प्रदेश सरकार की लचर व्यवस्था प्रणाली के चलते स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खुल रही है। अस्पताल में मरीजों के लिए दवा की व्यवस्था नहीं होने से तीमारदारों को बाहर मेडिकल स्टोर से मंहगी दवाएं खरीदनी पड़ रहीं हैं। सरकार और विभागीय अधिकारियों की ओर से अस्पताल में 24 घंटे दवाएं उपलब्ध होने और मुफ्त इलाज के दावे नजर नहीं आ रहें हैं। जमीनी हकीकत है कि सरकारी अस्पताल में दवा का अकाल पड़ा हुआ है। मरीज की जांच कराने के बाद पर्चा पर दवा लिख तो दी जाती हैं, लेकिन अस्पताल में दवा नहीं मिलने से तीमारदार परेशान रहते हैं। शनिवार को जिला अस्पताल में स्वास्थ्य उपचार करने आए मरीज और उनके तीमारदार दवा लेने के लिए भटकते रहे।

अस्पताल में पहुंचे भटवाड़ी ब्लॉक के क्यारा गांव निवासी करण चंद्र ने बताया कि वह गरीब परिवार से हैं। बीते शुक्रवार को स्कूल में उनका बच्चा सीढि़यों से गिर गया और उसके सिर पर चोट आई, बच्चे को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया। चिकित्सक के परामर्श पर बच्चे के लिए सारी दवा बाहर मेडिकल स्टोर से ही लानी पड़ी, जो दवा मेडिकल स्टोर में काफी महंगी पड़ी। सरकारी अस्पताल समझकर आया था, लेकिन यहां केवल बेड और पंजीकरण का शुल्क कम है, इसके अलावा सारी दवा बाहर मेडिकल स्टोर से महंगे दामों पर खरीदनी पड़ती हैं।

भटवाड़ी ब्लॉक के गणेशपुर गांव निवासी दिनेश सेमवाल ने बताया कि उन्हें हल्का बुखार था, स्वास्थ्य उपचार के लिए वह शनिवार को जिला अस्पताल में आए, अस्पताल में उन्हें कोई दवा नहीं मिली। चिकित्सक ने दवा के नाम पर उन्हें एक पर्चा थमा दिया। मेडिकल स्टोर में उस पर्चें को दिखाकर करीब 15 सौ रुपये की दवा लेनी पड़ी। कहा जिला अस्पताल में सुविधाओं के नाम पर मरीज और तीमारदार को गुमराह किया जा रहा है।

अस्पताल में 90 फीसद दवा उपलब्ध हैं, यदि चिकित्सक बाहर मेडिकल स्टोर से दवा मंगवा रहे हैं तो मरीज इसकी शिकायत कर सकते हैं। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बीएस रावत, सीएमएस

Posted By: Jagran

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