संवाद सूत्र नौगांव : तहसील बड़कोट के सुनारा गांव निवासी मृदुल रावत ने नौगांव सहित रवांई घाटी का मान बढ़ाया है। मृदुल सेना में लेफ्टिनेंट बन गए। मृदुल ने कक्षा एक से पांच तक की शिक्षा विद्या मंदिर नौगांव में हासिल की है। जिसके बाद मृदुल ने ओलंपस स्कूल देहरादून में कक्षा छह और सात की पढ़ाई की। फिर कक्षा आठ से 12वीं तक की शिक्षा आरआइएमसी देहरादून में ली। 21 मार्च 1999 को नौगांव में जन्मे मृदुल रावत शनिवार को भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) की पासिग आउट परेड का अंतिम पग पार करके सैन्य अफसर बन गए हैं। वह वर्ष 2016 में ट्रेनिग के लिए खड़गवासला पूना तथा जुलाई 2019 में आइएमए देहरादून आए। उन्होंने अपने पिता इंजीनियर मनोज रावत और माता शिक्षिका सरिता रावत का सपना पूरा किया है। मृदुल के पिता मनोज रावत एनएच बड़कोट में कार्यरत हैं, जबकि माता सरिता रावत जूनियर हाईस्कूल बलाड़ी में तैनात है। मृदुल की एक बड़ी बहन स्नेहा रावत कनाडा में पढ़ाई कर रही है। मृदुल रावत के सेना में अफसर बनने से न केवल माता-पिता बल्कि उनकी बड़ी बहन स्नेहा और दादा पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष उत्तरकाशी सकल चंद रावत भी काफी खुश है।

मृदुल रावत ने चार बार बॉक्सिग में गोल्ड मेडल और पास आउट होते हुए बेस्ट बॉक्सर का खिताब भी जीता। साथ ही नेशनल ब्लेजर का खिताब भी जीता। इसके अलावा एनडीए में भी चार गोल्ड मेडल तथा एक सिल्वर व इंडिया के बेस्ट बॉक्सर का खिताब भी जीता। मृदुल को आइएमए में भी इन्हें बेस्ट बॉक्सर, पीटी करने में विशेष रूचि रखने पर डबल ब्लू के रूप में दो बार नवाजा गया। मृदुल रावत ने बताया कि उनको पिता से मिली प्रेरणा से उन्हें यह कामयाबी मिली है। स्वजनों ने घर बैठकर देखी बेटे की कामयाबी

भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून में शनिवार को पासिंग आउट परेड के बाद तहसील बड़कोट के सुनारा गांव निवासी मृदुल रावत सेना में अफसर बन गए। उनके माता-पिता व अन्य स्वजनों को उम्मीद थी कि वह इस सुखद पल के गवाह बनेंगे। लेकिन, घर पर ही टीवी देखकर पासिग आउट परेड के गवाह बने। लेकिन, कोविड़-19 संक्रमण के कारण शामिल नहीं हो पाए। मृदुल रावत के पिता मनोज रावत व माता सरिता रावत का कहना है कि अपने बेटे की इस कामयाबी पर उन्हें पूरा गर्व है। परेड का कार्यक्रम उन्होंने देहरादून में अपने निवास पर ही टीवी पर देखा है। जबकि मृदुल रावत के दादा पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सकल चंद रावत ने नौगांव स्थित पैतृक घर में पासिंग आउट परेड का कार्यक्रम देखा, वहीं नाना गुलाब सिंह रावत, नानी बिजली देवी तथा मामा गुरूदेव सिंह व वसूदेव सिंह ने पौटी गांव में इस ऐतिहासिक क्षण के टीवी के माध्यम से गवाह बने। अपने बेटे की कामयाबी को लेकर एक मां के लिए अलग तरह का भावुक पल होता है। जिससे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। वे कहती हैं कि पहले पासिग आउट के बाद जेंटलमैन कैडेट्स अफसर बनकर घर आते थे। पर इस बार सीधे रेजीमेंट ज्वाइन करेंगे।

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