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धराली में कल्पकेदार मंदिर की तलाश: 2 दिन में 11 फीट तक खोदाई, जमीन से 7 मीटर नीचे है गर्भगृह; जानें इसकी खासियत

Published: Wed, 14 Oct 2026 07:49 AM (IST)

उत्तरकाशी के धराली में बीते वर्ष आई बाढ़ के मलबे में दबे प्राचीन कल्पकेदार मंदिर की तलाश में खोदाई जारी ...और पढ़ें

कल्पकेदार मंदिर की तलाश दो दिन में 11 फीट तक हुई खोदाई।

कल्पकेदार मंदिर की तलाश दो दिन में 11 फीट तक हुई खोदाई।

HighLights

  1. धराली में प्राचीन कल्पकेदार मंदिर की खोदाई जारी

  2. दो दिन में 10-11 फीट तक मलबा हटाया गया

  3. ग्रामीण चंदा इकट्ठा कर करवा रहे हैं यह कार्य

जागरण संवाददाता, उत्तरकाशी। बीते वर्ष धराली में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण मलबे में दबे प्राचीन कल्पकेदार मंदिर की तलाश को खोदाई काम जारी है। मंगलवार को दो दिन में यहां 10 से 11 फीट तक खोदाई की गई, खोदाई को लेकर स्थानीय ग्रामीणों सहित देश-प्रदेश के लोगों की टकटकी लगी हुई है।
बता दें कि यह पहली बार नहीं है, जब खीरगंगा नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के मलबे में दब चुके प्राचीन कल्पकेदार मंदिर की खोदाई हो रही हो।

यह मंदिर अब तक करीब तीन कई बार बाढ़ के दौरान मलबे में दब चुका है, इस कारण क्षेत्र लोगों को उम्मीद है कि उनके द्वारा मंदिर को मलबे से बाहर निकालने के लिए शुरू कराया गया, खोदाई का काम जरूर सफल होगा।

आपदा प्रभावित धराली में प्राचीन कल्पकेदार मंदिर की तलाश को खोदाई का काम जारी

श्री कल्पकेदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार का कहना है कि भगवान कल्पकेदार मंदिर आज से नहीं है, यह 240 मंदिरों के समूह में से एक रहा है। यह आपदा एक बार नहीं आई। 18वीं व 19वीं सदी में भी आई। कई बार मंदिर बाढ़ के मलबे में दबा है और दोबारा बाहर निकाला गया है। इस कारण ग्राम सभा सहित क्षेत्र के ग्रामीणों को यह आस्था है कि मंदिर को दोबारा बाहर निकाला जा सकता है। 

ग्रामीण एक्सकेवेटर मशीन से करवा रहे खोदाई

बीते पांच अगस्त को धराली आपदा की बरसी पर ही ग्रामीणों ने गांव के आराध्य सोमेश्वर देवता की अनुमति से मंदिर को मलबे से बाहर निकालने के लिए अनुमति दी थी, जिस पर नवरात्र के पहले दिन खोदाई कार्य शुरू करने का निर्णय लिया गया था। गत रविवार को विधिवत पूजा-अर्चना, भूमि पूजन कर इसकी शुरूआत की गई। बताया कि इस कार्य के लिए सभी चंदा इकट्ठा कर धनराशि जुटा रहे हैं।

जीपीएस की मदद से सर्च की गई थी लोकेशन

बीते वर्ष पांच अगस्त को धराली में खीर गंगा नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के मलबे में कल्पकेदार मंदिर का ऊपरी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया था और मंदिर मलबे में दब गया था। आपदा के बाद 21 अगस्त को श्री कल्पकेदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार, सचिव संजय पंवार, संयोजक दुर्गेश पंवार, सहसचिव संतोष पंवार, सदस्य सचेंद्र पंवार, भजन आदि ने जीपीएस ट्रेकिंग की मदद से मंदिर की खोज की और दूर-दूर तक पसरे मलबे के बीच मंदिर के मूल स्थान को चिन्हित किया था।

करीब 100 वर्ष बाद दोबारा की जा रही ये खोदाई

उपलब्ध जाननकारी के अनुसार कल्पकेदार मंदिर करीब 204 से 240 मंदिरों का समूह था, जिसके अधिकांश मंदिर 1803 में आई विनाशकारी बाढ़ में समूह बहने के साथ मलबे में दब गए थे। 1887 में यहां तीन मंदिर दिखाई देते थे। फिर 1926 में आई बाढ़ में मंदिर का आधा हिस्सा दब गया था, जिसे खोदाई कर दोबारा निकाला गया।

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बीते वर्ष 5 अगस्त 2025 को मंदिर दोबारा मलबे में दबा, 100 वर्ष के अंतराल पर दोबारा मलबे में दबे मंदिर को फिर खोदाई कर बाहर निकालने का काम जारी है, जो कि मंदिर के संभावित मुख्य स्थान से करीब 50-60 मीटर पीछे से की जा रही है, जिससे मंदिर को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।

कल्पकेदार मंदिर के बारे में

प्राचीन कल्पकेदार मंदिर धराली की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान हुआ करता था। गंगोत्री हाईवे से महज 50 मीटर की दूरी पर खीर गंगा नदी के तट पर स्थित यह मंदिर कत्यूरी स्थापत्य शैली में निर्मित था। मंदिर का गर्भगृह जमीन से करीब सात मीटर नीचे था, जहां सफेद स्फटिक का शिवलिंग विराजमान था। इसकी विशिष्ट बनावट और प्राचीनता श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। ह

गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद पड़ने वाले पहले सोमवार को कल्पकेदार मंदिर के कपाट पारंपरिक रीति-रिवाजों और धूमधाम के साथ खोले जाते थे। चारधाम यात्री गंगोत्री व यमुनोत्री धाम की यात्रा के साथ इस मंदिर के दर्शन करना नहीं भूलते थे।