जागरण संवाददाता, उत्तरकाशी। शनिवार की शाम को डबराणी के पास पहाड़ी से भारी भूस्खलन हुआ। भूस्खलन का दृश्य बेहद ही डरावना था। इस दौरान एक भेड़ पालक और एक ढाबा संचालक की जान बाल-बाल बची। इसके साथ गंगोत्री नेशनल हाईवे पर आवाजाही करने वाले करीब 25 व्यक्तियों की जान स्वयं सेवक राजेश रावत की सतर्कता से बच पाए।

उत्तरकाशी से गंगोत्री की ओर 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित डबराणी के पास शनिवार की दोपहर से पहाड़ी से रुक-रुककर पत्थर गिर रहे थे। जिसकी सूचना स्थानीय ग्रामीणों ने गंगनानी में स्वयं सेवक राजेश रावत को दी। राजेश रावत देरी किए बिना पांच किलोमीटर दूर  डबराणी पहुंचे। राजमार्ग पर दोनों ओर से वाहनों को रुकवाया। करीब ढाई बजे  डबराणी की पहाड़ी से भारी भूस्खलन हुआ। बड़े-बड़े बोल्डर गिरे।

पहाड़ी से भूस्खलन होता देख राजेश रावत ने डबराणी मोटर पुल के पास डेरे में रह रहे भेड़ पालक और ढाबा संचालक को आवाज देकर सुरक्षित स्थानों की ओर भगने के लिए कहा। जिससे उनकी जान बाल-बाल बची। पहाड़ी के बोल्डर गंगोत्री नेशनल हाईवे तक आए। एक बंद पड़े टीन सेट को भी नुकसान पहुंचा। यात्रा पुलिस चौकी के पास भी भारी बोल्डर आए। स्वयं सेवक राजेश रावत ने बताया कि भूस्खलन होने से पहले जब उन्होंने गंगोत्री राजमार्ग पर दोनों ओर से वाहनों को रोका तो वाहन चालक और वाहन में बैठे ग्रामीण वाहन रोकने पर आक्रोश व्यक्त कर रहे थे। लेकिन, भूस्खलन भयावह मंजर देखने के बाद सभी पांव में पड़ने लगे।

मनेरा बाइपास में भी हुआ भूस्खलन

जिला मुख्यालय के निकट मनेरा बाइपास पर लगातार पहाड़ी से मलबा और पत्थर आ रहे हैं। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। शनिवार को बिना बारिश के मनेरा बाइपास पर ज्ञानसू के सामने की पहाड़ी से भूस्खलन हुआ। जिसके कारण बाइपास बाधित हुआ। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से यातायात को रोका गया है।

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Edited By: Sunil Negi