भारत-तिब्बत का ऐतिहासिक व्यापारिक मार्ग... 2021 में खुला, बना उत्तराखंड का नया पर्यटन स्थल, पहुंचे लाखों पर्यटक
भारत-तिब्बत के बीच ऐतिहासिक व्यापारिक मार्ग गरतांग गली 2021 में खुलने के बाद उत्तराखंड का एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन गया है।

वर्ष 2021 में पहली बार पर्यटकों के लिए खोली गई थी ऐतिहासिक गरतांग गली

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अजय कुमार, उत्तरकाशी। भारत-तिब्बत के बीच कभी व्यापारिक संबंधों का गवाह रहा ऐतिहासिक गरतांग गली मार्ग एक नए पर्यटन स्थल के रूप में उभरा है, जो कि पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
वर्ष 2021 में जीर्णोद्धार के बाद पर्यटकों के लिए खोले गए इस ऐतिहासिक मार्ग पर छह वर्षों में 82774 पर्यटक पहुंच चुके हैं। इससे गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन को करीब 1.55 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
स्काईवाक जैसा अनुभव
गंगोत्री धाम से करीब 11 किमी पूर्व भैरोंघाटी स्थित लंका पुल के पास जाड़ गंगा के किनारे से होकर गरतांग गली का रास्ता निकलता है, जिसकी खासियत पहाड़ी के ऊपर बनाया गया सीढ़ीनुमा रास्ता है, करीब 136 मीटर लंबे व छह फीट चौड़े इस रास्ते के ऊपर चलना पर्यटकों को रोमांच के साथ स्काईवाक जैसा अनुभव कराता है।
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एक ओर खड़ी पहाड़ी चट्टान और दूसरी ओर गहरी खाई के बीच बने इस ऐतिहासिक मार्ग से गुजरना पर्यटकों के लिए खास अनुभव बन रहा है।
बता दें कि भारत-चीन युद्ध 1962 के बाद सुरक्षा कारणों से इस मार्ग को बंद कर दिया गया था। बाद में, पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन ने करीब 64 लाख की लागत से इसका जीर्णोद्धार कराया। गंगोत्री नेशनल पार्क अंतर्गत आने वाले गरतांग गली पर अब पार्क के अन्य सभी ट्रेक रूट से सबसे ज्यादा पर्यटक पहुंचते हैं।
वर्षवार आए गरतांग गली पहुंचे पर्यटकों का विवरण
- वर्ष -पर्यटक -राजस्व
- 2021-22 -5457 -853480
- 2022-23 -11741 -1800150
- 2023-24 -17208 -2913500
- 2024-25 -16189 -3444400
- 2025-26 -13710 -2811700
- 15 सितंबर तक -18469 -3735000
- योग -82774 -15558230
बीते वर्ष गरतांग गली ट्रेक पर आपदा के चलते पर्यटक कम पहुंचे, नहीं तो साल दर साल गरतांग आने वाले पर्यटकों का ग्राफ बढ़ा है। एक अप्रैल से लेकर 30 नवंबर तक पर्यटक इसका दीदार कर सकते हैं। सप्ताहांत में यहां अच्छी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। - मयंक गर्ग, उप निदेशक गंगोत्री नेशनल पार्क
