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उत्तर की काशी की अनूठी परंपरा: विश्वनाथ मंदिर में खेली जाती भस्म होली, खुशी में नाचते हैं शिव भक्त

Published: Thu, 26 Feb 2026 10:49 PM (IST)

उत्तरकाशी के प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर में रंगभरी होली से पहले 'भस्म होली' मनाई जाती है। होलिका दहन के दिन ...और पढ़ें

उत्तरकाशी के विश्वनाथ मंदिर की भस्म होली में झूमते श्रद्धालु। जागरण आर्काइव

उत्तरकाशी के विश्वनाथ मंदिर की भस्म होली में झूमते श्रद्धालु। जागरण आर्काइव 

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अजय कुमार, उत्तरकाशी। रंगभरी होली से पहले उत्तरकाशी जनपद में एक अनूठी होली भी खेली जाती है, जिसमें शिव भक्त एक-दूसरे पर भस्म लगाकर नाचते झूमते हैं।

प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर में खेली जाने वाली यह अनूठी होली है भस्म होली, जिसका आयोजन प्रतिवर्ष छोटी होली यानि कि होलिका दहन वाले दिन होता है।

भस्म होली की शुरुआत सुबह की आरती के बाद स्वयंभू शिवलिंग पर हवन कुंड व धूनी की भस्म लगाकर होता है। इसके बाद मंदिर प्रांगण में ही भोले के जयकारों के बीच श्रद्धालु भस्म होली खेलते हैं।

बच्चों से लेकर बड़े सभी आयु वर्ग के श्रद्धालुओं के साथ पर्यटक भी इस होली में शामिल होते हैं।

जनपद मुख्यालय स्थित प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर में उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर पिछले करीब 9-10 वर्षों से भस्म होली का आयोजन किया जा रहा है।

इस होली के लिए मंदिर में होने वाले यज्ञ व हवन कुंडों की वर्षभर की राख को एकत्रित किया जाता है।

छोटी होली के दिन मंदिर में सुबह की आरती के बाद सबसे पहले स्वयंभू शिवलिंग पर हवन कुंड व धूनी की भस्म लगाकर आशीर्वाद लिया जाता है।

इसके बाद मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं के बीच स्वस्ति वाचन के साथ मंदिर के महंत हवा में भस्म उड़ाकर भस्म होली की शुरुआत करते हैं।

इस होली में स्थानीय विधायक से लेकर नगर पालिकाध्यक्ष आदि जनप्रतिनिधि भी शामिल होते हैं। ढोलक की थाप पर कुमाऊंनी होली गीत ऐजा ए बसंतियां होई खेलू लो होई होई...की धुनों पर श्रद्धालु जमकर भस्म होली का आनंद लेते हैं।

साल दर साल भस्म होली का यह आयोजन भव्य रुप लेता जा रहा है, जिसमें विभिन्न धार्मिक संगठन विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल आदि के कार्यकर्ता भी शामिल होते हैं।

ऐसी मान्यता है कि भस्म होली खेलने से लोगों के सभी कष्ट दूर होते है। वहीं, इस होली को लेकर बच्चों, बड़ों सभी में खासा उत्साह देखने को मिलता है।

देश के प्रमुख शिव मंदिरों में से एक है यह मंदिर

उत्तरकाशी स्थित प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर देश के प्रमुख शिव मंदिरों में से एक है। मान्यता है कि प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर की स्थापना भगवान परशुराम ने की थी।

यहां तप करने से उनका क्रोध शांत हुआ था। इस कारण उत्तरकाशी को सौम्यकाशी नाम से भी जाना जाता है।

इस मंदिर में अनादि काल से 56 सेंटीमीटर ऊंचा स्वंभू शिवलिंग मौजूद है, जो कि दक्षिणावर्त यानि कि दक्षिण की ओर झुका हुआ है।

दक्षिणावर्त शिवलिंग को दिव्य व कलियुग में कल्याणकारी, फलदायी व पुण्यदायी माना जाता है। यही वजह है कि चारधाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्री इस मंदिर के दर्शन करना नहीं भूलते हैं।

पारंपरिक त्योहार के संरक्षण व संवर्धन के लिए यहां करीब पिछले दस सालों से भस्म होली खेली जा रही है। सालभर में लोग अपने दुखों, तकलीफों को दूर करने के लिए आहूतियां देते हैं, उसी की राख को यहां भगवान के प्रसाद के रुप में लेकर भस्म होली खेली जाती है।
-महंत अजय पुरी, काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तरकाशी।

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