उत्तराखंड में पोल्ट्री फार्म खोलने पर मिलेगी 63 लाख रुपये तक की बंपर सब्सिडी, इन नियमों का करना होगा पालन
उत्तराखंड में पोल्ट्री कारोबार को बढ़ावा देने के लिए कुक्कुट विकास नीति-2025 के तहत 63 लाख रुपये तक की सब्सिडी ...और पढ़ें


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जागरण संवाददाता, रुद्रपुर। उत्तराखंड में पोल्ट्री कारोबार को बढ़ावा देने के लिए कुक्कुट विकास नीति-2025 के तहत व्यावसायिक पोल्ट्री फार्म स्थापित करने पर 63 लाख रुपये तक सब्सिडी मिलेगी। मैदानी क्षेत्रों में परियोजना लागत का 30 प्रतिशत और पर्वतीय क्षेत्रों में 40 प्रतिशत अनुदान देने का प्रविधान है। नीति के तहत वर्ष 2030 तक राज्य में 54 पोल्ट्री इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
नीति के तहत मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में व्यावसायिक लेयर फार्म तथा ब्रायलर पैरेंट फार्म स्थापित किए जा सकेंगे। मैदानी क्षेत्र में 30 हजार पक्षियों की क्षमता वाले लेयर फार्म के लिए 1.80 करोड़ रुपये की परियोजना लागत निर्धारित है।
इस पर अधिकतम 54 लाख रुपये अनुदान मिलेगा। पर्वतीय क्षेत्र में 15 हजार पक्षियों की क्षमता वाले फार्म पर 48 लाख रुपये तक सब्सिडी का प्रावधान है। ब्रायलर पैरेंट फार्म के लिए मैदानी क्षेत्र में 10 हजार पक्षियों की क्षमता पर 2.10 करोड़ रुपये की परियोजना लागत निर्धारित है।
इस पर 63 लाख रुपये तक अनुदान मिल सकता है। पर्वतीय क्षेत्र में पांच हजार पक्षियों की क्षमता वाले फार्म के लिए 1.40 करोड़ रुपये की लागत पर 56 लाख रुपये तक सब्सिडी मिलेगी।
भूमि और बैंक की सहमति जरूरी
आवेदक के पास उत्तराखंड में भूमि का स्वामित्व होना चाहिए अथवा कम से कम 10 वर्ष का पंजीकृत पट्टा समझौता होना आवश्यक है। भूमि विवादग्रस्त नहीं होनी चाहिए।
आवेदन के साथ बैंक का सहमति पत्र भी देना होगा। नीति में अधिवास की बाध्यता नहीं है। भारतीय नागरिकों, एनआरआई और अन्य देशों के उद्यमियों सहित व्यक्ति, साझेदारी फर्म, कंपनियां और स्टार्टअप आवेदन कर सकते हैं।
पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मंजूरी
मुख्य पशुपालन अधिकारी डॉ. आशुतोष जोशी ने बताया कि वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक मैदानी क्षेत्रों में 26 और पर्वतीय क्षेत्रों में 28 इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य है।
परियोजनाओं को पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मंजूरी दी जाएगी। स्वीकृति बजट की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। निर्धारित क्षमता से छोटी इकाइयां एमएसएमई नीति के तहत लाभ ले सकती हैं। इसके अलावा, उन्नत तकनीक अपनाने वाले उद्यमियों को नवाचार प्रोत्साहन के रूप में अधिकतम एक लाख रुपये देने का भी प्रावधान है।
