छुट्टी न मिलने पर भड़का बंदीरक्षक, सरकारी राइफल लेकर पहुंचा जेलर के घर, दी जान से मारने की धमकी
छुट्टी स्वीकृत न होने पर सितारगंज केंद्रीय कारागार के बंदीरक्षक ने प्रभारी जेलर को सरकारी राइफल से जान से मारने की धमकी दी।

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, सितारगंज । छुट्टी स्वीकृत न होने से नाराज केंद्रीय कारागार सितारगंज में तैनात बंदीरक्षक शुभम पांडेय लोडेड सरकारी राइफल लेकर प्रभारी जेलर (कारापाल) प्यारे लाल के आवास पर पहुंचकर जान से मारने की धमकी दी।
आरोप है कि बंदीरक्षक ने प्रभारी जेलर के आवास के दरवाजे पर पैर से प्रहार कर उन्हें बाहर निकालने का प्रयास किया। शोर गुल सुनकर पहुंचे जेल अधिकारियों और कर्मचारियों ने किसी तरह उससे सरकारी हथियार लिया।
इसके बावजूद बंदीरक्षक ने मारपीट का प्रयास किया और पुलिस की मौजूदगी में भी धमकियां दीं। प्रभारी जेलर की शिकायत पर पुलिस ने बंदीरक्षक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही। उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की तीन धाराओं में प्राथमिकी पंजीकृत कर विवेचना शुरू कर दी है।
प्रभारी जेलर प्यारे लाल की ओर से वरिष्ठ जेल अधीक्षक को दिए गए शिकायती पत्र के आधार पर सितारगंज कोतवाली पुलिस ने प्राथमिकी पंजीकृत की। विवेचना उपनिरीक्षक जगत सिंह शाही को सौंपी गई है। शिकायत में बंदीरक्षक के व्यवहार, सरकारी हथियार लेकर ड्यूटी स्थल छोड़ने और प्रभारी जेलर के आवास पर पहुंचकर धमकी देने समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता प्रभारी जेलर के अनुसार, केंद्रीय कारागार में तैनात वर्ष 2024 बैच के बंदीरक्षक शुभम पांडेय बुधवार सुबह 9:40 बजे जेल परिसर से फोन कर उनसे बातचीत की। इस दौरान उसने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए धमकियां दी।
आरोप है कि इसके बाद बंदीरक्षक लोडेड सरकारी राइफल लेकर ड्यूटी स्थल छोड़कर जेल परिसर के बाहर स्थित उनके आवास पर पहुंच गया। इसकी जानकारी मिलने पर वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने प्रभारी जेलर को समय रहते सतर्क किया और उन्हें आवास से बाहर नहीं निकलने की हिदायत दी।
दरवाजे पर प्रहार कर बाहर निकालने का प्रयास
तहरीर के अनुसार, बंदीरक्षक ने प्रभारी जेलर के आवास पर पहुंचकर दरवाजे पर पैर से प्रहार किया और उन्हें बाहर निकालने का प्रयास किया। इस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सूचना मिलने पर जेल अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे।
शिकायतकर्ता ने बताया कि वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने हस्तक्षेप करते हुए बंदीरक्षक से सरकारी हथियार अलग करवाया। इसके बावजूद उसने प्रभारी जेलर के साथ हाथापाई और मारपीट का प्रयास किया। शिकायत में आशंका जताई गई है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया जाता तो कोई गंभीर घटना हो सकती थी।
प्रशिक्षण के दौरान अनुशासनहीनता का भी उल्लेख
शिकायती पत्र में बंदीरक्षक के पूर्व व्यवहार का भी उल्लेख किया गया है। प्रभारी कारापाल के अनुसार, लखनऊ स्थित राज्य जेल प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण के दौरान कथित अनुशासनहीन आचरण के कारण बंदीरक्षक का प्रशिक्षण पूरा नहीं हो सका था।
शिकायत में उसे प्रशिक्षण से वापस भेजे जाने और बाद में चिकित्सकीय परामर्श एवं उपचार के लिए भेजे जाने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, ये विवरण शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों और दावों का हिस्सा हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
तीन धाराओं में प्राथमिकी, विवेचना शुरू
पुलिस ने शिकायत के आधार पर बीएनएस की धारा 126(2), 351(3) और 352 के तहत प्राथमिकी पंजीकृत की है। धारा 126(2) सदोष अवरोध, धारा 351(3) गंभीर आपराधिक धमकी और धारा 352 शांति भंग कराने के आशय से जानबूझकर अपमान करने से संबंधित है।
मामले की विवेचना उपनिरीक्षक जगत सिंह शाही को सौंपी गई है। पुलिस अब शिकायत में बताए गए घटनाक्रम और आरोपों की जांच करेगी। बंदीरक्षक का पक्ष तथा जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
