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सितारगंज में लोडेड सरकारी राइफल लेकर प्रभारी कारापाल के आवास पहुंचा बंदीरक्षक, जान से मारने की धमकी का आरोप

By Avinash ShrivastavaEdited By: Nirmala Bohra
Published: Wed, 14 Oct 2026 05:36 PM (IST)

सितारगंज केंद्रीय कारागार में बंदीरक्षक शुभम पांडेय पर लोडेड सरकारी राइफल के साथ ड्यूटी स्थल छोड़कर प्रभारी कारापाल प्यारे लाल ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, सितारगंज । केंद्रीय कारागार सितारगंज में तैनात बंदीरक्षक शुभम पांडेय पर लोडेड सरकारी राइफल लेकर ड्यूटी स्थल छोड़ने और प्रभारी कारापाल प्यारे लाल के आवास पर पहुंचकर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, बंदीरक्षक ने आवास के दरवाजे पर जोर-जोर से प्रहार कर उन्हें बाहर निकालने का प्रयास किया।

आरोप है कि जेल अधिकारियों और कर्मचारियों के हस्तक्षेप के बाद सरकारी हथियार अलग करवाया गया, लेकिन इसके बावजूद बंदीरक्षक ने मारपीट का प्रयास किया और पुलिस की मौजूदगी में भी धमकियां दीं। प्रभारी कारापाल की शिकायत पर पुलिस ने बंदीरक्षक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की तीन धाराओं में प्राथमिकी पंजीकृत कर विवेचना शुरू कर दी है।

प्रभारी कारापाल प्यारे लाल की ओर से वरिष्ठ जेल अधीक्षक को दिए गए शिकायती पत्र के आधार पर सितारगंज कोतवाली पुलिस ने बुधवार प्राथमिकी पंजीकृत की। मामले में बीएनएस की धारा 126(2), 351(3) और 352 के तहत कार्रवाई की गई है। विवेचना उपनिरीक्षक जगत सिंह शाही को सौंपी गई है। शिकायत में बंदीरक्षक के व्यवहार, सरकारी हथियार लेकर ड्यूटी स्थल छोड़ने और प्रभारी कारापाल के आवास पर पहुंचकर धमकी देने समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

शिकायतकर्ता के अनुसार, केंद्रीय कारागार में तैनात वर्ष 2024 बैच के बंदीरक्षक शुभम पांडेय ने बुधवार की सुबह करीब 9:40 बजे जेल के भीतर से फोन कर उनसे बातचीत की। इस दौरान कथित तौर पर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए धमकियां दी गईं। आरोप है कि इसके बाद बंदीरक्षक लोडेड सरकारी राइफल लेकर ड्यूटी स्थल छोड़कर जेल परिसर के बाहर स्थित प्रभारी कारापाल के आवास पर पहुंच गया। इस घटनाक्रम की जानकारी मिलने पर वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने प्रभारी कारापाल को समय रहते सतर्क किया और उन्हें आवास से बाहर नहीं निकलने की हिदायत दी।

दरवाजे पर प्रहार कर बाहर निकालने का प्रयास

तहरीर के अनुसार, बंदीरक्षक ने प्रभारी कारापाल के आवास पर पहुंचकर दरवाजे पर जोर-जोर से प्रहार किया और उन्हें बाहर निकालने का प्रयास किया। इस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सूचना मिलने पर जेल अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मौके पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने हस्तक्षेप करते हुए बंदीरक्षक से सरकारी हथियार अलग करवाया। इसके बावजूद उसने प्रभारी कारापाल के साथ हाथापाई और मारपीट का प्रयास किया। शिकायत में आशंका जताई गई है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया जाता तो कोई गंभीर घटना हो सकती थी।

पुलिस की मौजूदगी में भी धमकी देने का आरोप

प्रभारी कारापाल प्यारे लाल के अनुसार, घटना की सूचना मिलने पर पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची। आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में भी बंदीरक्षक का आक्रामक व्यवहार जारी रहा। उसने प्रभारी कारापाल और उनके स्वजन को जान से मारने की धमकी दी तथा अपमानजनक टिप्पणियां कीं। शिकायतकर्ता ने अपनी और अपने स्वजन की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका जताते हुए पुलिस से आवश्यक कार्रवाई की मांग की। तहरीर में यह भी कहा गया है कि वरिष्ठ जेल अधीक्षक की ओर से समय रहते सतर्क किए जाने के कारण प्रभारी कारापाल सावधान हो गए थे।

प्रशिक्षण के दौरान अनुशासनहीनता का भी उल्लेख

शिकायती पत्र में बंदीरक्षक के पूर्व व्यवहार का भी उल्लेख किया गया है। प्रभारी कारापाल के अनुसार, लखनऊ स्थित राज्य जेल प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण के दौरान कथित अनुशासनहीन आचरण के कारण बंदीरक्षक का प्रशिक्षण पूरा नहीं हो सका था। शिकायत में उसे प्रशिक्षण से वापस भेजे जाने और बाद में चिकित्सकीय परामर्श एवं उपचार के लिए भेजे जाने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, ये विवरण शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों और दावों का हिस्सा हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

तीन धाराओं में प्राथमिकी, विवेचना शुरू

पुलिस ने शिकायत के आधार पर बीएनएस की धारा 126(2), 351(3) और 352 के तहत प्राथमिकी पंजीकृत की है। धारा 126(2) सदोष अवरोध, धारा 351(3) गंभीर आपराधिक धमकी और धारा 352 शांति भंग कराने के आशय से जानबूझकर अपमान करने से संबंधित है। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक जगत सिंह शाही को सौंपी गई है। पुलिस अब शिकायत में बताए गए घटनाक्रम और आरोपों की जांच करेगी। बंदीरक्षक का पक्ष तथा जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।