Rudrapur Kisan Mela: एक एकड़ में खेती के साथ कई कमाई, 2.5 से 3 लाख तक आय का मॉडल
पंतनगर किसान मेले में एक एकड़ एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल प्रदर्शित किया गया है, जिससे सीमांत किसान खेती के साथ ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संसू, पंतनगर । सीमांत किसानों के लिए कम भूमि में अधिक और सालभर आय हासिल करने का रास्ता एकीकृत कृषि प्रणाली दिखा रही है। पंतनगर किसान मेले में प्रदर्शित एक एकड़ मॉडल में खेती के साथ मछली पालन, सब्जी, गन्ना और पशुपालन को जोड़ा गया है। उचित प्रबंधन और संसाधनों के बेहतर उपयोग से इस मॉडल से सालाना करीब 2.5 से 3 लाख रुपये तक आय की संभावना बताई गई है।
एग्रोनॉमी विभाग, पंतनगर विश्वविद्यालय के परियोजना अधिकारी डा. डीके सिंह के अनुसार, एक एकड़ भूमि को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर फसल, सब्जी, चारा, पशुपालन और तालाब को आपस में जोड़ा गया है। इस मॉडल को एक से डेढ़ एकड़ भूमि वाले किसान भी अपनी जमीन, पानी और श्रम की उपलब्धता के अनुसार अपना सकते हैं। इसका उद्देश्य किसान को एक ही फसल पर निर्भर रखने के बजाय दूध, मछली, सब्जी, गन्ना, अंडा और अन्य उत्पादों से लगातार आय उपलब्ध कराना है।
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शुरुआती लागत
मॉडल को नए सिरे से तैयार करने में एक एकड़ के लिए करीब तीन से चार लाख रुपये और डेढ़ एकड़ के लिए करीब चार से पांच लाख रुपये तक शुरुआती लागत आ सकती है। इसमें तालाब, पशुशाला, सिंचाई व्यवस्था, पशु, बीज और अन्य जरूरी संसाधनों की लागत शामिल है। किसान के पास तालाब, पशुशाला या पशु पहले से उपलब्ध होने पर शुरुआती लागत कम हो जाएगी। वहीं उपलब्ध संसाधनों के अनुसार किसान एक से डेढ़ एकड़ में मॉडल के अलग-अलग घटकों का क्षेत्रफल घटा-बढ़ा सकता है।
मॉडल में पशुओं के गोबर-मूत्र से जैविक खाद और जैविक घोल तैयार किए जा सकते हैं, जबकि फसल अवशेषों का उपयोग चारे के रूप में किया जा सकता है। मुर्गी और पशुपालन से निकलने वाले जैविक अवशेषों का उपयोग भी कृषि एवं मत्स्य प्रणाली में किया जा सकता है। इससे बाहरी इनपुट पर खर्च घटाने और संसाधनों के पुनर्चक्रण में मदद मिलती है।
डा. सिंह ने बताया कि उपलब्ध पानी, श्रम और भूमि के अनुसार किसान इस मॉडल में बकरी पालन जैसी गतिविधियां भी जोड़ सकते हैं। एक से डेढ़ एकड़ जमीन वाले किसान इसे अपनी क्षमता के अनुसार अपनाकर खेती के साथ कई आय स्रोत विकसित कर सकते हैं। इससे कम क्षेत्र में उत्पादन के साथ रोजगार और आय के कई अवसर तैयार होते हैं।
आय बढ़ाने का तरीका
एक एकड़ में अलग-अलग गतिविधियां जोड़कर किसान पूरे वर्ष आय के स्रोत बना सकता है। फसल अवशेष पशुओं के चारे, गोबर से खाद और तालाब आधारित संसाधनों का खेती में उपयोग किया जा सकता है। इससे लागत घटाने के साथ जोखिम भी कम होता है और किसी एक फसल के खराब होने पर दूसरी गतिविधियों से आय बनी रह सकती है।
