Rudrapur Kisan Mela: नौकरी छोड़ बागवानी से मालामाल हुए अजय नेगी, 60 किसानों को भी बनाया बागवान
अजय नेगी ने नौकरी छोड़कर रुद्रप्रयाग में बागवानी को अपनाकर मासिक 60-70 हजार रुपये की आय अर्जित की है।


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संवाद सूत्र, पंतनगर । नौकरी छोड़कर गांव लौटे रुद्रप्रयाग के अजय नेगी ने बागवानी को रोजगार का साधन बनाकर न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि क्षेत्र के 60 किसानों को भी बागवानी से जोड़ दिया।
अगस्त्यमुनि विकासखंड के ग्राम भणज निवासी 32 वर्षीय अजय नेगी पशुपालन विभाग में संविदा पर अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत थे और उन्हें करीब 25 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था।
2019-20 में पिता के स्वास्थ्य खराब होने पर नौकरी छोड़कर गांव लौटे और खेती-बागवानी को अपना रोजगार बना लिया। आज वह खेती-बागवानी से 60 से 70 हजार रुपये प्रतिमाह तक आय अर्जित कर रहे हैं।
सब्जी और फल उत्पादन के साथ जूस के छोटे प्लांट से शुरुआत
बीए तक शिक्षा प्राप्त अजय ने शुरुआत सब्जी और फल उत्पादन के साथ जूस के छोटे प्लांट से की। वर्तमान में वह अपनी 12 नाली और आठ नाली भूमि पर धान, दलहन, मड़ुवा, झंगोरा और गेहूं के साथ किवी, माल्टा, नारंगी, नींबू, कागजी नींबू, ब्रोकली, मिर्च और शिमला मिर्च का उत्पादन कर रहे हैं। इनमें सब्जी, माल्टा और किवी उनकी आय के प्रमुख स्रोत बन चुके हैं।
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अजय ने कृषि एवं उद्यान विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र जगधार, रानीखेत, पंतनगर विश्वविद्यालय, जाड़ी और पलायन आयोग से प्रशिक्षण लेकर खेती के तौर-तरीकों को बेहतर किया। अपनी सफलता के बाद उन्होंने आसपास के किसानों को भी बागवानी से जोड़ने की पहल शुरू की। अब तक 60 किसान उनके मार्गदर्शन से बागवानी अपना चुके हैं। वह किसानों को पॉलीहाउस, घाटी बागवानी और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं।
उनके उत्पाद स्थानीय बाजार के साथ रुद्रप्रयाग और देहरादून तक पहुंच रहे हैं। कृषि-बागवानी में योगदान के लिए उन्हें 13 नवंबर 2024 को राज्य स्तरीय ग्रामीण उद्यमिता विकास पुरस्कार, 26 सितंबर 2025 को गैरसैंण विधानसभा भवन में पलायन आयोग का प्रशस्ति पत्र, 3 जनवरी 2026 को माल्टा महोत्सव में राज्य स्तरीय सम्मान और पंतनगर में बाजार आधारित प्रसार के लिए प्रशस्ति पत्र मिल चुका है।
खेती को बनाया रोजगार का साधन
अजय ने नौकरी छोड़ने के बाद पहाड़ में ही रोजगार का रास्ता तलाशा। 25 हजार रुपये मासिक वेतन वाली नौकरी छोड़कर उन्होंने खेती-बागवानी को अपनाया और अब 60 से 70 हजार रुपये प्रतिमाह तक आय अर्जित कर रहे हैं। विविध फसलों और फलों की खेती से उन्होंने जोखिम कम किया और स्थानीय बाजार को आय का आधार बनाया। उनकी पहल अब दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
