संवाद सहयोगी, बाजपुर : भाकियू ने सितारगंज के कर्ज में डूबे किसान द्वारा आत्महत्या किए जाने पर दुख प्रकट किया है। किसानों ने कहा कि सरकार गन्ने व गेहूं का भुगतान नहीं कर रही है, जबकि बैंक नोटिस भेज कर परेशान कर रहे हैं। ऐसे में किसान समाज में मान-सम्मान के लिए आत्महत्या न करे तो क्या करे? इस दौरान कई किसान भावुक हो गए और बोले कि सरकार अभी कितनों का इम्तिहान लेगी। अभी तो करीब-करीब हर घर का किसान कर्ज में डूबा में है।

भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष कर्म सिंह पड्डा व दलजीत सिंह रंधावा ने कहा कि किसान यदि आत्महत्या कर रहा है तो उसके लिए सरकार की नीति दोषी है। यदि समय रहते किसानों को उसकी उपज का भुगतान मिल जाए तो उसकी सांस चलती रहती है। पहले गन्ने का भुगतान नहीं मिला और अब गेहूं का भी भुगतान नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा सितारगंज के किसान का मामला 20 मई को होने वाली महापंचायत में रखा जाएगा। इस दौरान गन्ना मूल्य भुगतान व किसानों की अन्य समस्या के लिए एक से दस जून तक होने वाले आंदोलन की रणनीति भी बनाई जाएगी। इस मौके पर अजीत प्रताप सिंह, बिजेंद्र डोगरा, सुखदेव सिंह आदि अनेक मौजूद थे।

By Jagran