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खटीमा स्कूल में मोबाइल की लत छुड़ाने का अनोखा तरीका बना चर्चा का विषय, इंटरनेट मीडिया पर वीडियो हुआ वायरल

By Rajendra Singh MitadiEdited By: Rahul Chauhan
Published: Tue, 22 Sep 2026 08:04 PM (IST)

खटीमा के एक निजी स्कूल में बच्चों में मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए आयोजित जागरूकता कार्यक्रम का वीडियो वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है।

HighLights

  1. स्कूल में मोबाइल की लत छुड़ाने का अनोखा कार्यक्रम।

  2. वायरल वीडियो पर प्रशासन ने मांगा स्कूल से स्पष्टीकरण।

  3. अभिभावकों ने बच्चों में सकारात्मक बदलाव की सराहना की।

जागरण संवाददाता, खटीमा। बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत को लेकर एक निजी विद्यालय द्वारा किया गया जागरूकता कार्यक्रम इंटरनेट मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। कार्यक्रम का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने के बाद जहां लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

वहीं प्रशासन ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों से संबंधित विद्यालय से स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए हैं। वायरल वीडियो शनिवार की है। जो खटीमा के बरिया मझोल गांव के निजी स्कूल की है।

वायरल वीडियो में कुछ बड़े विद्यार्थियों की आंखों पर पट्टियां बंधी दिखाई दे रही हैं। जिसे यह कहते दिख रहे थे डाक्टर में हमारी आंखे निकाल दी। कार्यक्रम के दौरान छोटे बच्चे भावुक होते और रोते हुए भी नजर आ रहे हैं।

वीडियो के इंटरनेट मीडिया पर आने के बाद इसे लेकर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कई लोगों ने कार्यक्रम के स्वरूप पर सवाल उठाए, जबकि अनेक अभिभावकों ने इसे बच्चों को मोबाइल की लत से दूर करने का प्रभावी प्रयास बताया।

विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को डराना नहीं, बल्कि मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना था।

विद्यालय के प्रबंध निदेशक जितेंद्र सिंह ने बताया कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम पूर्व में अन्य विद्यालयों में भी आयोजित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि लगातार कई अभिभावक अपने बच्चों के मोबाइल और स्क्रीन टाइम को लेकर चिंता जता रहे थे तथा विद्यालय से इस दिशा में कोई पहल करने का अनुरोध कर रहे थे। उसी के आधार पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।

उनके पास कई अभिभावकों के संदेश और वीडियो उपलब्ध हैं, जिनमें बच्चों की मोबाइल पर बढ़ती निर्भरता को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का मकसद केवल जागरूकता पैदा करना था।

किसी भी बच्चे को मानसिक रूप से भयभीत करने या डराने का प्रयास नहीं किया गया। उस दिन अनुपस्थित रहने वाले कुछ विद्यार्थियों के अभिभावक स्वयं विद्यालय पहुंचे और बच्चों को कार्यक्रम में शामिल कराने का आग्रह किया। अभिभावक विद्यालय की इस पहल का समर्थन कर रहे थे

हेमा चुफाल प्रधानाचार्य

उनका बेटा पहली कक्षा में पढ़ता है। अन्य अभिभावकों के साथ वे भी बच्चों में मोबाइल की बढ़ती लत का मुद्दा स्कूल के सामने उठा चुके थे। स्कूल से घर लौटते ही बच्चे मोबाइल देखने लगते थे, जिससे वह चिंतित थे।

उन्होंने कहा कि जागरूक कार्यक्रम के बाद बच्चों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है और रात में भी बिना मोबाइल के सो जाता है। उनके तीन बच्चे हैं और सबसे छोटी बच्ची भी मोबाइल की ओर आकर्षित होने लगी थी। उनके अनुसार इस पहल से बच्चों में सुधार आया है और मोबाइल का उपयोग कम हुआ है। ऐसे प्रयास समय-समय पर होने चाहिए।

होशियार सिंह अभिभावक

उनकी बेटी इसी विद्यालय में पढ़ती है और इस कार्यक्रम को अनावश्यक रूप से डरावना बताना सही नहीं है। बच्चों में मोबाइल की बढ़ती आदत को लेकर उन्होंने भी कई बार चिंता जताई थी। इस गतिविधि का बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

अब बच्चे स्कूल से आने के बाद मोबाइल में समय बिताने के बजाय खेलकूद और अन्य गतिविधियों में अधिक रुचि ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों में किसी तरह का डर का माहौल नहीं है और वे घर पर पूरी तरह सामान्य हैं।

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पूजा कन्याल अभिभावक

बच्चों को मोबाइल की लत से दूर करने और जागरूक करने का उद्देश्य सराहनीय हो सकता है, लेकिन किसी भी जागरूकता कार्यक्रम का तरीका भी सही होना चाहिए ना कि डरावना। शिक्षा विभाग से संबंधित विद्यालय प्रबंधन से स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए गए हैं।

तुषार सैनी एसडीएम खटीमा

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