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उत्तराखंड कांति हत्याकांड: मॉडलिंग के सपने ने उजाड़ा परिवार... शव की हुई बेकद्री, रात 11 बजे अंतिम संस्कार

Published: Sat, 22 Aug 2026 09:33 AM (IST)Updated: Sat, 22 Aug 2026 11:44 AM (IST)

काशीपुर में कांति हत्याकांड में डॉक्टरों और पुलिस की लापरवाही के कारण शव को पोस्टमार्टम के लिए 170 किमी तक दौड़ाना पड़ा।

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जागरण संवाददाता, काशीपुर छोटी लापरवाही भी किस कदर भारी पड़ सकती है इसका नमूना शुक्रवार को देखने को मिला। काशीपुर उप जिला अस्पताल के डॉक्टर और पुलिस की लापरवाही के कारण मृतका कांति के शव को 170 किमी दौड़ाना पड़ा। मृतका के स्वजन को भी चक्कर काटने पड़े।

गुरुवार सुबह रामनगर हाईवे किनारे काशीपुर की रहने वाली 18 वर्षीय कांति झा का खून से लथपथ शव मिला था। कांति के सिर पर गोली लगी होने का अंदेशा होने से पुलिस ने डॉक्टर के पैनल से पोस्टमार्टम करने का निर्णय लिया था। इसके लिए गुरुवार शाम ही शव हल्द्वानी के राजकीय मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया।

शुक्रवार सुबह शव का पोस्टमार्टम होना था। डॉक्टर ने मेमो और अन्य दस्तावेजों में कमी बताकर पोस्टमार्टम करने से इनकार कर दिया। स्वजन जरूरी कागज को व्हाट्सएप पर मनाने की गुहार लगाते रहे लेकिन मेडिकल कॉलेज का प्रबंधन इस बात के लिए राजी नहीं हुआ।

दूसरी बार काशीपुर लाया गया शव

शुक्रवार दोपहर 12 बजे शव को दोबारा काशीपुर उप जिला अस्पताल के लिए रवाना किया गया। पुलिस टीम और साथ गई कांति की बड़ी बहन शांति शव लेकर अपराह्न दो बजे काशीपुर पहुंचे। जहां जरूरी कागज बनाने के बाद चार बजे शव हल्द्वानी के लिए रवाना किया गया। शाम 6:30 बजे पोस्टमार्टम हो पाया। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आनी बाकी है।

रात 11 बजे हुआ अंतिम संस्कार

शुक्रवार देर रात 11 बजे ढेला नदी किनारे स्थित श्मशान घाट पर कांति के शव की अंत्येष्टि की गई।
पिता बच्ची झा ने शव को मुखाग्नि दी। मां बिंदुल झा, बड़ी बहन शांति समेत अन्य स्वजन अंत्येष्टि में शामिल रहे।

सीएमएस ने कहा- ओपीडी पर्ची नहीं दे पाए

काशीपुर उप जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर संदीप दीक्षित का कहना है कि शव के साथ भेजे गए दस्तावेज में मरीज की ओपीडी पर्ची नहीं थी। त्रुटिवश ऐसा हो गया था। संबंधित डॉक्टर को भविष्य में ऐसी चूक न करने की हिदायत दी गई है।

सीओ बोले- दस्तावेज में जबरन कमी निकाली गई

काशीपुर सीओ प्रशांत कुमार का कहना है कि दस्तावेजों में कोई बड़ी कमी नहीं थी। मेडिकल कालेज के जिम्मेदार अधिकारी ने जबरन कागजों में कमी निकालकर पोस्टमार्टम लटकाया।

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