जागरण संवाददाता, सितारगंज : दो साल से सिडकुल के उद्योग आधा दर्जन गांवो के लिए सिरदर्द बन गए है। उद्योगों के प्रदूषित पानी ने लोगों का जीना हराम कर रखा है। प्रदूषित पानी सार्वजनिक नालो, नहरों में बहाया जाता है। पानी के नमूने फेल होने के बाद भी ग्रामीणों को राहत देने के कोई उपाय नहीं किए गए हैं, जिससे जनजीवन बेहाल हो गया है। हालात ये हो गए है कि इंडस्ट्रीयल पार्क शुरू होते ही दुर्गध का सामाना करना पड़ता है। प्रदूषित पानी से नहरों में झाग के पहाड़ बन जाते है।

सिडकुल में 85 उद्योग लगे हुए है। जिनमें डेढ़ दर्जन से अधिक उद्योगों में उत्पादन के समय केमिकल युक्त जहरीला प्रदूषित पानी निकलता है। जो नहरों और नालों से होता हुआ खेतों में पहुंचता है। सिडकुल फेज टू में प्रदूषित पानी का जमाव वातावरण को दुर्गध से सराबोर कर रहा है। सिद्घगब्र्याग के ग्रामीणों ने एनजीटी से भी शिकायत की। जिसके बाद हरकत में आए प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड के अधिकारी सक्रिय हुए। पानी के नमूने भी लिए गए। जिनमें दो नमूने फेल भी हो गए। इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई उद्योग संचालकों पर नहीं की गई।

सिद्घगब्र्याग के प्रधान का कहना है कि दो साल से प्रदूषित पानी ने जहां लोगों की सेहत प्रभावित कर दी है वही खेतों की उर्वरा शक्ति भी कमजोर हो गई है। सिडकुल आरएम ने बताया कि एल्डिको को नालों की सफाई के निर्देश दिए गए है। प्रदूषित पानी फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड के अधिकारी ने बताया कि उद्योगों से प्रदूषित पानी सार्वजनिक स्थलों पर पहुंच रहा है। इसके लिए दो नमूने फेल होने की पुष्टि हुई है। इसके बाद उद्योगों को नोटिस भी भेजे गए है।

बैगुल नहर से जुड़ा है नाला

सिडकुल से प्रदूषित पानी की निकासी करने वाला नाला अपर बैगुल नहर से जुड़ा है। छह माह पहले सिंचाई नहर में दूषित जल छोड़ने पर सिंचाई विभाग से इन नालों को चिह्नित किया था। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता बीसी नैनवाल ने बताया कि नाला चिह्नित किया गया था। जिसके बाद नोटिस की कार्रवाई की गई थी।

Posted By: Jagran

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