जागरण संवाददाता, रुद्रपुर :

झोलाछाप की दवा खाने से ट्रांजिट कैंप निवासी मासूम की हालत बिगड़ गई। परिजन उसे निजी अस्पताल ले गए, लेकिन उसे भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद जब उसे जिला अस्पताल ले गए तो चिकित्सक ने हाथ खड़े कर दिए। इससे भड़के लोगों ने मासूम को भर्ती कराए जाने के लिए हंगामा काटा। इसी बीच उसकी मौत हो गई। इससे परिजनों में कोहराम मच गया।

ट्रांजिट कैंप, नारायण कालोनी निवासी किशन कुमार ने बताया कि वह मजदूरी करता है। दो दिन पहले उसके आठ साल के पुत्र ¨मटू की तबीयत खराब हो गई थी। इस पर ट्रांजिट कैंप के एक झोलाछाप की क्लीनिक में उसे दिखाया, जहां से मिली दवा उसने ¨मटू को खिलाई। शनिवार रात को दवा खाने के बाद उसकी हालत और बिगड़ गई। उसे खून की उल्टी होने लगी। इस पर रविवार सुबह वह पत्नी के साथ पुत्र को किच्छा रोड स्थित प्राइवेट अस्पताल ले गया। ¨मटू की गंभीर हालत देख उसे अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया। इस पर पति-पत्नी पुत्र को गोद में लेकर सड़क पर ही बैठ गए। यह देख वहां से गुजर रही समाजसेवी अनीता पंत ने उन्हें कार से जिला अस्पताल पहुंचाया। बताया जा रहा है कि ¨मटू की हालत देख जिला अस्पताल में भी उसे भर्ती नहीं कराया गया। इससे भड़के लोगों ने हंगामा काट दिया। बाद में चिकित्सक ने जब ¨मटू को देखा, तब तक वह मर चुका था। बाद में परिजन पुत्र का शव लेकर रोते बिलखते घर को चले गए। इंसेट-

दिमागी बुखार से पीड़ित होने की आशंका

¨मटू को बीते दो दिनों से बुखार था। उसके पिता किशन के मुताबिक अच्छे अस्पताल में भर्ती करने के लिए उसके पास रुपये नहीं थे इसलिए वह झोलाछाप से उपचार करा रहा था। उसकी हालत में सुधार आने के बजाय और बिगड़ने लगी। आशंका जताई जा रही है कि ¨मटू की मौत दिमागी बुखार से हुई है।

Posted By: Jagran