विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

मुख्यमंत्री धामी ने कहा मजबूत एम-पैक्स से होगा उत्तराखंड का ग्रामीण विकास

By Anuj SaxenaEdited By: Rahul Chauhan
Published: Mon, 21 Sep 2026 04:52 PM (IST)

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मजबूत एम-पैक्स से गांव और उत्तराखंड समृद्ध होंगे, सहकारिता ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रभावी माध्यम है।

News Article Hero Image
timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

संसू, पंतनगर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मजबूत एम-पैक्स से गांव मजबूत होंगे और मजबूत गांवों से समृद्ध उत्तराखंड का निर्माण होगा। सहकारिता को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रभावी माध्यम बताते हुए उन्होंने कहा कि किसानों, युवाओं और मातृशक्ति को सहकारिता से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास से वर्चुअल माध्यम से गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में सहकार भारती उत्तराखंड की ओर से आयोजित श्री लक्ष्मणराव ईनामदार द्वितीय सहकारिता नेतृत्व प्रशिक्षण वर्ग के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने सहकार भारती के संस्थापक श्रद्धेय लक्ष्मणराव ईनामदार को नमन करते हुए कहा कि सहकारिता को सशक्त बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सकती है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में पलायन रोकने, पर्वतीय कृषि को बढ़ावा देने, स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहकारिता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने कहा कि पैक्स सहकारिता व्यवस्था की आधारशिला हैं। बदलती जरूरतों के अनुरूप इन्हें एम-पैक्स के रूप में अधिक सक्षम और प्रभावी बनाया जा रहा है। एम-पैक्स के माध्यम से किसानों को बेहतर सुविधाएं, युवाओं को रोजगार के अवसर और ग्रामीण क्षेत्रों को आर्थिक मजबूती देने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पैक्स सहकारिता व्यवस्था की आधारशिला हैं। बदलती जरूरतों के अनुरूप इन्हें एम-पैक्स के रूप में अधिक सक्षम और प्रभावी बनाया जा रहा है।

एम-पैक्स के माध्यम से किसानों को बेहतर सुविधाएं, युवाओं को रोजगार के अवसर और ग्रामीण क्षेत्रों को आर्थिक मजबूती देने का प्रयास किया जा रहा है।

धामी ने कहा कि एम-पैक्स को प्रभावी बनाने के लिए कुशल और दूरदर्शी नेतृत्व जरूरी है। इसी उद्देश्य से नेतृत्व प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण केवल जानकारी बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नेतृत्व क्षमता, कार्यदृष्टि और नई सोच विकसित करने का माध्यम भी है

उन्होंने कहा कि सरकार सहकारिता को केवल समितियों तक सीमित रखने के बजाय इसे जनभागीदारी और आर्थिक सशक्तीकरण का माध्यम बना रही है। सहकारिता का लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।

कैबिनेट मंत्री डा. धन सिंह रावत ने कहा कि सहकार भारती किसानों के लिए समर्पित संगठन है और उसका उद्देश्य सहकारिता को जन-जन तक पहुंचाना है।

कार्यक्रम में अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर प्रशिक्षण वर्ग का शुभारंभ किया। इस दौरान ‘सहकार ग्रंथम्’ स्मारिका और सोशल मीडिया रील का विमोचन, देवभूमि सारथी राज्य सहकारी संघ लिमिटेड का अनावरण तथा नई सहकारिता नीति का लोकार्पण किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों को तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण, बाजार, आवश्यक सुविधाएं और अन्य सहयोग उपलब्ध कराया जा सकता है।

सहकारिता को केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित न रखते हुए इसे किसानों और ग्रामीण समुदाय की सामाजिक-आर्थिक प्रगति का आधार बनाने की आवश्यकता है।

उन्होंने ईएमपैक्स के माध्यम से किसानों तक विभिन्न सेवाएं पहुंचाने, कृषि उत्पादन बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करने की संभावनाओं पर जोर दिया।

कृषि के साथ बागवानी, सब्जी उत्पादन, पशुपालन और डेयरी जैसी गतिविधियों को सहकारी व्यवस्था से जोड़कर किसानों की आय के विविध स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।

कार्यक्रम में सचिव सहकारिता डा. अहमद इकबाल, सहकार भारती के राष्ट्रीय महासचिव दीपक चौरसिया, प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार गौड़, संगठन मंत्री मणिराम नौटियाल, प्रदेश कोषाध्यक्ष सुधीर कुमार जोशी सहित डा. बृजेश, डा. दिनेश कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।

प्रशिक्षण से गांवों में नेतृत्व को मिलेगी नई दिशा

एम-पैक्स को बनाया जा रहा अधिक सक्षम
पैक्स को एम-पैक्स के रूप में विकसित कर किसानों को बेहतर सुविधाएं और ग्रामीण क्षेत्रों को आर्थिक मजबूती देने पर जोर।

प्रसंस्करण और बाजार से जोड़ना जरूरी

डा. कश्यप ने सहकारी, संगठित और अर्द्ध-संगठित क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता भी रेखांकित की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है।

किसानों को प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ना भी जरूरी है, जिसमें सहकारी संस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

यह भी पढ़ें- पंतनगर-जेवर उड़ान को लगा झटका, इंडिगो ने दूसरी सेवा 14 अक्टूबर तक रोकी

महिला सशक्तीकरण पर जोर

कार्यक्रम में महिला सशक्तीकरण और परिवार आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। सहकारी संस्थाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने, स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया गया।

महिला समूहों, सहकारी संस्थाओं और स्थानीय उद्यमों के बीच समन्वय से परिवार की आय तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

पंतनगर से नई पहल का आगाज

कार्यक्रम में सहकार ग्रंथम् स्मारिका, सोशल मीडिया रील का विमोचन, देवभूमि सारथी राज्य सहकारी संघ का अनावरण और नई सहकारिता नीति का लोकार्पण किया गया।

यह भी पढ़ें- पंतनगर विश्वविद्यालय की बड़ी सफलता: आईवीएफ तकनीक से साहीवाल गाय ने दिया बद्री बछिया को जन्म, नस्ल संरक्षण में मिलेगी मदद