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ये है भाजपा की टॉप जोड़ी, उत्तराखंड में सिख-पंजाबी समाज को दिया अपनेपन का संदेश, गिनाए अहम फैसले

Published: Fri, 11 Sep 2026 01:20 PM (IST)

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रुद्रपुर में सिख-पंजाबी गौरव सम्मेलन को संबोधित किया, ...और पढ़ें

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अनुज सक्सेना, रुद्रपुर । तराई की सियासत में सिख-पंजाबी समाज और किसान वर्ग की अहमियत को देखते हुए भाजपा ने एक बार फिर समाज को अपनेपन का संदेश देने की कोशिश की।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सिख-पंजाबी गौरव सम्मेलन में एक सुर में केंद्र और राज्य सरकार के उन फैसलों को गिनाया, जिन्हें उन्होंने सिख समाज के सम्मान, आस्था और हितों को देखते हुए लिया है। दोनों नेताओं का जोर इस बात पर रहा कि सिख समाज के हित और विकास के लिए भाजपा सरकारें किस शिद्दत से काम कर रही हैं।

दो दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम के अंतिम दिन रुद्रपुर में सिख - पंजाबी गौरव सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने करतारपुर कारिडोर खोलने, 1947 के विभाजन पीड़ितों की स्मृति में विभाजन विभीषिका स्मृति स्थल के निर्माण जैसे फैसलों का उल्लेख किया।

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वहीं उन्होंने साहिबजादों के सर्वोच्च बलिदान की स्मृति में वीर बाल दिवस घोषित किए जाने को भी प्रमुखता से रखा। यह भी बताने से नहीं चूके कि 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों को न्याय और सम्मान दिलाने के लिए भाजपा की सरकारों ने कोई कसर नहीं छोड़ी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में सिख आस्था के प्रमुख केंद्र हेमकुंड साहिब से जुड़े विकास कार्यों को सामने रखा। उन्होंने बताया कि गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक रोपवे का निर्माण जल्द पूरा होने वाला है। इन घोषणाओं और फैसलों के जरिए भाजपा नेताओं ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि केंद्र से लेकर राज्य तक भाजपा सरकार सिख समाज की आस्था और हितों के प्रति संवेदनशील है।

किसान आंदोलन के बाद भाजपा से दूरी पाटने का संदेश

भाजपा की इस कवायद के पीछे तराई की बदली राजनीतिक परिस्थितियां भी अहम मानी जा रही हैं। केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ चले किसान आंदोलन में ऊधम सिंह नगर में किसानों की सक्रियता प्रदेश में सबसे अधिक रही थी। आंदोलन के दौरान तराई में भाजपा को किसान वर्ग की नाराजगी का सामना करना पड़ा। इसके बाद से सिख-पंजाबी किसान तबके के एक हिस्से के भाजपा से दूरी बनाने की चर्चा होती रही है।

इस बीच सियासी नुकसान ने भाजपा के माथे पर चिंता की लकीरें आैर खींच दी थीं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में ऊधम सिंह नगर जिले में भाजपा के पास आठ सीटें थीं, जबकि 2022 में यह संख्या घटकर चार रह गई। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए तराई में अपने पुराने सामाजिक समीकरण को मजबूत करना जरूरी माना जा रहा है। इस सम्मेलन को राजनीतिक पंडित इस नजरिये से भी देख रहे हैं।

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संदेश साफ...आस्था भी, किसान भी

रुद्रपुर में आयोजित सम्मेलन को इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा नेतृत्व ने सीधे तौर पर किसान आंदोलन या उससे उपजी नाराजगी पर चर्चा करने के बजाय सिख समाज की आस्था, सम्मान और उससे जुड़े फैसलों को केंद्र में रखा। करतारपुर कारिडोर से लेकर वीर बाल दिवस और हेमकुंड साहिब रोपवे तक के मुद्दों को गिनाकर पार्टी ने भावनात्मक और धार्मिक जुड़ाव मजबूत करने की कोशिश की।

तराई में सिख-पंजाबी समाज का बड़ा हिस्सा कृषि और कारोबार से जुड़ा है। यही वजह है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का रुद्रपुर आना और मुख्यमंत्री के साथ एक ही मंच से सिख-पंजाबी समाज को संबोधित करना महज सामाजिक सम्मेलन तक सीमित नहीं माना जा रहा। इसे आगामी चुनाव से पहले उस वर्ग के बीच भरोसा फिर से कायम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।