मेडिकल कॉलेज प्रवेश में फर्जी एससी-ओबीसी दस्तावेज: बाजपुर में पांच गिरफ्तार, जांच जारी
मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए फर्जी एससी और ओबीसी दस्तावेजों के इस्तेमाल के मामले में बाजपुर में पांच लोगों ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सहयोगी, जागरण, बाजपुर। मेडिकल कालेजों में प्रवेश के लिए फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर प्रमाण-पत्र बनवाने के मामले में प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की है। राजस्व टीम की ओर से पकड़े गए पांच लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
आरोपितों के पास से छह मोबाइल भी बरामद किए गए हैं। वहीं नौ लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच में फर्जी पाए गए अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्रों को निरस्त करने के साथ पूर्व में जारी प्रमाण-पत्रों का दोबारा सत्यापन कराया जा रहा है।
डीएम के निर्देश पर तहसील क्षेत्र में मेडिकल कालेजों में प्रवेश के लिए प्रस्तुत किए गए प्रमाण-पत्रों का सत्यापन कराया जा रहा था, जिसमें कुछ अभ्यर्थी संबंधित पते पर निवासरत नहीं मिले।
विभिन्न विभागों से दस्तावेजों की जांच कराने पर फर्जी पते और एससी व ओबीसी प्रमाण-पत्र तैयार कराने का मामला सामने आया था। गुरुवार को तहसीलदार प्रताप सिंह चौहान के नेतृत्व में राजस्व टीम ने पांच लोगों को कोतवाली बाजपुर में पेश किया।
पूछताछ में अभ्यर्थी चित्रा ने ग्राम रैंटा का निवासी दर्शाकर 20 अगस्त को अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र और 21 अगस्त को स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाया। दोनों प्रमाणपत्रों में लगाए गए आधार कार्ड, बिजली बिल, स्थानांतरण प्रमाणपत्र, राशन कार्ड आदि के सत्यापन में संबंधित विभागों ने इन्हें अपने स्तर से जारी नहीं किए जाने की जानकारी दी।
इसी तरह अनुराग भोजवाल को ग्राम मुंडिया कला का निवासी दर्शाते हुए तीन जुलाई को अन्य पिछड़ा वर्ग जाति प्रमाणपत्र और छह जुलाई को स्थायी निवास प्रमाणपत्र जारी हुआ।
जांच में राशन कार्ड और परिवार रजिस्टर में दूसरे व्यक्ति का विवरण मिलने व उसे छलपूर्वक जोड़ने का पता चला। राजकीय इंटर कालेज के अभिलेखों में भी अनुराग के नाम से संबंधित प्रविष्टि नहीं मिली।
ग्राम प्रधान ने भी उक्त नाम का व्यक्ति गांव में निवासरत नहीं होने की जानकारी दी। वहीं कुमारी दीक्षा के नाम से रैंटा निवासी दर्शाकर एक सितंबर को स्थायी निवास और 31 अगस्त को अन्य पिछड़ा वर्ग जाति प्रमाणपत्र बनवाया गया।
इसमें टीसी, परिवार रजिस्टर, वर्ष 1988 की मतदाता सूची, बिजली बिल समेत अन्य दस्तावेज लगाए गए थे। वहीं कुमारी रिया सिंह के नाम से भी रैंटा निवासी दर्शाकर एक सितंबर को स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाया गया।
इन चारों के फर्जी दस्तावेजों की जांच के बाद निरस्त कर दिया गया। इधर गिरफ्तार किए गए पांच आरोपितों में मो. आलम निवासी सुल्तानपुर पट्टी, चेयरमैन श्याम बिहारी भोजवाल निवासी बरखेड़ा पीलीभीत, शिवम माथुर निवासी इज्जतनगर बरेली, अर्चना पत्नी आशीष भारद्वाज निवासी मुंडियाकला बाजपुर व रोहित निवासी हरलालपुर बाजपुर शामिल हैं।
पुलिस ने गिरफ्तार लोगों के छह मोबाइल साक्ष्य के तौर पर कब्जे में लिए है। वहीं प्रशासन अभ्यर्थियों के स्वजन व अन्य संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए गए।
दस्तावेज बनाने पर लिए पांच से 50 हजार रुपये
23 सितंबर को प्रमाणपत्रों की जांच के लिए संबंधित लोगों को तहसील कार्यालय बुलाया गया था। पूछताछ के दौरान मो. आलम निवासी शिवनगर, सुल्तानपुर पट्टी ने बयान में बताया कि दीक्षा और चित्रा के जाति व स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उसे पांच हजार रुपये दिए गए थे।
अनुराग भोजवाल के पिता श्याम बिहारी भोजवाल ने बयान में कहा कि अपने पुत्र का डा. सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज हल्द्वानी में दाखिला कराने के लिए जाति व स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाने के एवज में उन्होंने बरेली निवासी हरपाल को 50 हजार रुपये दिए थे।
उन्होंने इस काम में शिवम माथुर, रोहित निवासी हरलालपुर और अर्चना पत्नी आशीष भारद्वाज निवासी मुंडिया कला की मदद मिलने की बात भी कही। पूछताछ में तहसील के एक अधिवक्ता द्वारा भी सहयोग किए जाने की बात सामने आई, हालांकि नाम याद नहीं होने की जानकारी दी गई।
फर्जी किराएदार सत्यापन का भी आरोप
पूछताछ में शिवम माथुर ने बताया कि वह श्याम बिहारी भोजवाल को रोहित के माध्यम से अर्चना के घर ले गया था और उन्हें कथित तौर पर फर्जी किराएदार के रूप में तस्दीक करने को कहा गया था।
अर्चना ने भी अपने बयान में रोहित की ओर से श्याम बिहारी आदि को फर्जी किराएदार बनाने के लिए अपने पास लाए जाने की बात कही। वहीं रोहित ने बताया कि शिवम के कहने पर उसने श्याम बिहारी को अर्चना से मिलवाया और अनुराग के लिए किराए के मकान की व्यवस्था कराई।
चुनाव जीतने के बाद आए थे भाजपा में
नगर पंचायत बरखेड़ा पीलीभीत के चेयरमैन श्याम बिहारी भोजवाल ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था। आचार संहिता के दौरान लाखों की शराब बंटवाने को मंगवाई थी, जिन्हें जेल भी भेजा गया था। चुनाव जीतने के बाद वह फिर भाजपा में आ गए थे।
पूर्व में जारी प्रमाण-पत्रों का भी सत्यापन
एसडीएम के निर्देश पर पूर्व में जारी किए गए प्रमाण-पत्रों का पुनः सत्यापन कराया जा रहा है। पूरे मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट डीएम को भेजी जा रही है।
इधर, संयुक्त टीम में तहसीलदार प्रताप सिंह चौहान, राजस्व निरीक्षक सतपाल, कृपाल सिंह, राजस्व एसआइ जानकी प्रसाद द्विवेदी, मो. अजमल और महिला राजस्व एसआइ हेमा यादव शामिल रहे। पुलिस टीम में वरिष्ठ उप निरीक्षक जसविन्दर सिंह, एसआइ कैलाश नगरकोटी, वरिष्ठ सिपाही राकेश भट्ट, अदिति शामिल रहीं।
