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उत्तराखंड के बाजपुर में फर्जी प्रमाण पत्र घोटाला, नौ लोगों पर केस, चार सर्टिफिकेट रद

By Jeevan SinghEdited By: Nirmala Bohra
Published: Thu, 24 Sep 2026 10:36 AM (IST)

उत्तराखंड के बाजपुर में मेडिकल छात्रों के दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान फर्जी स्थायी निवास और जाति प्रमाण पत्र बनाने का मामला सामने आया है।

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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संवाद सहयोगी, बाजपुर उत्तराखंड के विभिन्न मेडिकल कालेजों में अध्ययनरत छात्रों से संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान तहसील बाजपुर क्षेत्र में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर स्थायी निवास और जाति प्रमाणपत्र बनवाने का मामला सामने आया है।

राजस्व विभाग की जांच के बाद ग्राम रैंटा के राजस्व उपनिरीक्षक अजमल खान की तहरीर पर पुलिस ने फर्जीवाड़े में संलिप्त नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान चार लोगों के नाम सामने आए प्रमाणपत्र तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं।

राजस्व उपनिरीक्षक अजमल खान ने कोतवाली पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उत्तराखंड के विभिन्न मेडिकल कालेजों में अध्ययनरत छात्रों से संबंधित प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए प्राप्त हुए थे। जांच में ग्राम रैंटा और मुंडिया कला का निवासी दर्शाकर कूटरचित अभिलेखों के आधार पर प्रमाणपत्र बनवाने की जानकारी सामने आई।

स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाया

तहरीर के अनुसार चित्रा पुत्री महेश ने ग्राम रैंटा का निवासी दर्शाकर 20 अगस्त को अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र और 21 अगस्त को स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाया। दोनों प्रमाणपत्रों में लगाए गए आधार कार्ड, बिजली का बिल, स्थानांतरण प्रमाणपत्र, राशन कार्ड, परिवार रजिस्टर और खतौनी आदि के सत्यापन में संबंधित विभागों ने इन्हें अपने स्तर से जारी नहीं किए जाने की जानकारी दी।

इसी तरह अनुराग भोजवाल पुत्र श्याम बिहारी भोजवाल को ग्राम मुंडिया कला का निवासी दर्शाते हुए तीन जुलाई को अन्य पिछड़ा वर्ग जाति प्रमाणपत्र और छह जुलाई को स्थायी निवास प्रमाणपत्र जारी हुआ।

जांच में राशन कार्ड और परिवार रजिस्टर में दूसरे व्यक्ति का विवरण मिलने तथा उसे कथित रूप से छलपूर्वक जोड़ने की बात सामने आई। राजकीय इंटर कालेज के अभिलेखों में भी अनुराग के नाम से संबंधित प्रविष्टि नहीं मिली। ग्राम प्रधान ने भी उक्त नाम का व्यक्ति गांव में निवासरत नहीं होने की जानकारी दी।

तहरीर के अनुसार कुमारी दीक्षा पुत्री शिव नारायण चौधरी के नाम से रैंटा निवासी दर्शाकर एक सितंबर को स्थायी निवास और 31 अगस्त को अन्य पिछड़ा वर्ग जाति प्रमाणपत्र बनवाया गया।

इसमें टीसी, परिवार रजिस्टर, वर्ष 1988 की मतदाता सूची, बिजली का बिल, राशन कार्ड और आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज लगाए गए थे। वहीं कुमारी रिया सिंह पुत्री मुन्नी लाल सिंह के नाम से भी रैंटा निवासी दर्शाकर एक सितंबर को स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाया गया। संबंधित प्रमाणपत्रों की जांच के बाद इन्हें तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया।

50 हजार रुपये देने की बात कही
बाजपुर : 23 सितंबर को प्रमाणपत्रों की जांच के लिए संबंधित लोगों को तहसील कार्यालय बाजपुर बुलाया गया था। पूछताछ के दौरान मौ. आलम निवासी शिवनगर, सुल्तानपुर पट्टी ने बयान में बताया कि दीक्षा और चित्रा के जाति व स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उसे पांच हजार रुपये दिए गए थे।

अनुराग भोजवाल के पिता श्याम बिहारी भोजवाल ने बयान में कहा कि अपने पुत्र का सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज हल्द्वानी में दाखिला कराने के लिए जाति व स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाने के एवज में उन्होंने बरेली निवासी हरपाल को 50 हजार रुपये दिए थे। उन्होंने इस काम में शिवम माथुर, रोहित निवासी हरलालपुर और अर्चना पत्नी आशीष भारद्वाज निवासी मुंडिया कला की मदद मिलने की बात भी कही। पूछताछ में तहसील के एक अधिवक्ता द्वारा भी सहयोग किए जाने की बात सामने आई, हालांकि नाम याद नहीं होने की जानकारी दी गई।

फर्जी किरायेदार सत्यापन का भी आरोप
बाजपुर : पूछताछ में शिवम माथुर ने बताया कि वह श्याम बिहारी भोजवाल को रोहित के माध्यम से अर्चना के घर ले गया था और उन्हें कथित तौर पर फर्जी किरायेदार के रूप में तस्दीक करने को कहा गया था। अर्चना ने भी अपने बयान में रोहित द्वारा श्याम बिहारी आदि को फर्जी किरायेदार बनाने के लिए अपने पास लाए जाने की बात कही। वहीं रोहित ने बताया कि शिवम के कहने पर उसने श्याम बिहारी को अर्चना से मिलवाया और अनुराग के लिए किराये के मकान की व्यवस्था कराई।

छह मोबाइल फोन किए जब्त
बाजपुर : राजस्व विभाग की तहरीर के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपितों के कब्जे से मिले मोबाइल फोन की जांच में कूटरचित दस्तावेजों से संबंधित साक्ष्य पाए गए। इसके बाद छह मोबाइल फोन जब्त किए गए। राजस्व विभाग ने संबंधित दस्तावेजों और मोबाइल फोन समेत आरोपितों को पुलिस की अभिरक्षा में सौंपते हुए मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर आवश्यक विधिक कार्रवाई का अनुरोध किया है। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

मेडिकल कालेज के प्रमाणपत्रों के सत्यापन से खुला मामला
बाजपुर : उत्तराखंड के विभिन्न मेडिकल कालेजों में अध्ययनरत छात्रों से संबंधित प्रमाणपत्रों के सत्यापन के दौरान बाजपुर तहसील क्षेत्र के दस्तावेज जांच के दायरे में आए। संबंधित विभागों से अभिलेखों का सत्यापन कराने पर कई प्रमाणपत्रों में लगाए गए राशन कार्ड, परिवार रजिस्टर, बिजली बिल, शैक्षिक अभिलेख, मतदाता सूची और अन्य दस्तावेजों का संबंधित सरकारी रिकार्ड से मिलान नहीं हुआ। इसके बाद राजस्व विभाग ने मामले में विस्तृत जांच कर पुलिस को तहरीर दी।

चार लोगों के प्रमाणपत्र निरस्त
बाजपुर : जांच में सामने आए प्रकरण में चित्रा पुत्री महेश, अनुराग भोजवाल पुत्र श्याम बिहारी भोजवाल, कुमारी दीक्षा पुत्री शिव नारायण चौधरी और कुमारी रिया सिंह पुत्री मुन्नी लाल सिंह के नाम से जारी स्थायी निवास और जाति प्रमाणपत्रों की जांच की गई। राजस्व विभाग के अनुसार सत्यापन में अभिलेखों में अनियमितता सामने आने के बाद संबंधित प्रमाणपत्र तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं।