मधुसुदन बहुगुणा, नई टिहरी

सिंचाई के लिए पानी की समस्या से जूझ रहे चंबा-मसूरी फलपट्टी के चौपड़ियाल गांव निवासी खुशीराम ने इन दिनों अपने खेतों में विदेशी सब्जियां लगाई हैं। जापान समेत अन्य देशों में उगने वाली इन सब्जियों की खासियत यह है कि इनमें अधिक सिंचाई की जरूरत नहीं होती। इसके अलावा इनकी फसल भी जल्दी तैयार होती है। अगर खुशीराम का यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले दिनों में चंबा-मसूरी फलपट्टी के किसानों को नकदी फसलों की खेती में एक नया विकल्प मिलेगा।

चंबा-मसूरी फलपट्टी के चौपड़ियाल गांव निवासी 50 वर्षीय खुशीराम पिछले 25 वर्षो से करीब 40 नाली जमीन पर सब्जी की फसल उगा रहे हैं। यही उनकी आर्थिकी का जरिया भी है। एक सीजन में वो करीब एक लाख तक की सब्जियां बेचते हैं। नकदी फसल उत्पादन के साथ ही वे सब्जियों में समय के अनुसार नए प्रयोग भी करते रहते हैं। 40 किमी में फैले चंबा-मसूरी फलपट्टी में सबसे ज्यादा समस्या पानी की है। सिंचाई के लिए पानी न होने के चलते किसान मौसम की मेहरबानी पर निर्भर रहते हैं। समय पर यदि बारिश नहीं होती तो उन्हें इसका नुकसान उठाना पड़ता है। इससे निजात पाने के लिए खुशीराम ने देहरादून समेत अन्य जगहों से विदेशी सब्जियों के बीज मंगाकर खेतों में लगाए हैं। इन सब्जियों की खासियत यह है कि इनके लिए पानी की अधिक आवश्यकता नहीं होती। साथ ही कम नमी में भी इनका उत्पादन अच्छा होता है। खुशीराम बताते हैं, जापान में उगाए जाने वाले लेटोज में चौड़ी हरी पत्तियां होती हैं, जो पौष्टिक गुणों से भरी होती है। लेटोज बर्गर में भी प्रयोग की जाती है। ऐसे में इसकी काफी डिमांड रहती है। अभी तक कई बड़ी कंपनियां इन सब्जियों को बाहर से मंगाते हैं। स्थानीय बाजार में विदेशी सब्जियां मिलने से काफी फायदा होगा और क्षेत्रवासियों को भी सब्जियों के रूप में विकल्प मिलेगा।

वहीं जापान का केरी टमाटर बाजार में बिकने वाले टमाटरों की अपेक्षा काफी छोटे होते हैं। पहाड़ में भी छोटे टमाटर उगाए जाते हैं, लेकिन इनका स्वाद खट्टा होता है। जबकि, केरी टमाटर काफी मीठा होता है। खुशीराम का कहना है कि अगर उनका यह प्रयोग सफल रहा तो वो भविष्य में विदेशी सब्जियां उगाने के लिए अन्य किसानों को भी प्रेरित करेंगे।

इन सब्जियों को उगाने की कर रहे तैयारी: चाइनीज कैबेज, केरी टमाटर लेटोज, मिजोना, केल, रेड कैबेज, लीक, जुकनी।

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