संवाद सहयोगी, नई टिहरी:

प्रमोटिग द एडवांसमेंट ऑफ एप्लाइड साइंस विषय पर आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं ने विज्ञान को विभिन्न रहस्यों की खोज और गणित का प्रयोग में महत्वपूर्ण योगदान बताया।

एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के एसआरटी परिसर बादशाहीथौल में दो दिवसीय कार्यशाला के का उद्घाटन मुख्य अतिथि वाडिया संस्थान के पूर्व निदेशक प्रोफेसर बीआर अरोड़ा, विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर एचएस धामी पूर्व कुलपति कुमाऊं विश्वविद्यालय व प्रोफेसर एके सिंह पूर्व निदेशक एसआरटी परिसर बादशाहीथौल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर प्रोफेसर बीआर अरोड़ा ने एप्लाइड सांइस के विभिन्न स्वरूपों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि विज्ञान में विभिन्न रहस्यों की खोज और प्रयोग में गणित का महत्वपूर्ण योगदान है। विज्ञान में गणित का समावेश ही उसकी खोज को सार्थक बनाता है। प्रोफेसर एचएस धामी ने कहा कि गणित में विभिन्न योजकों के संयोजन और अनुवाद से जहां गणित का सरलीकरण होता है वहीं विभिन्न शोधार्थियों व छात्रों को इसे समझने में आसानी रहती है। इसलिए गणित में विभिन्न योजकों का प्रयोग व्यापक रूप से होता है। परिसर के पूर्व निदेशक प्रोफसर एके सिंह ने कहा है कि गणित विषय का प्रारंभिक काल से वर्तमान तक विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पूर्व निदेशक प्रोफेसर आरसी रमोला ने पर्यावरण रेडान, थोरान के प्रभावों के गुण दोष पर शोधार्थियों के मध्य अपने विभिन्न शोध कार्यों के माध्यम से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों से अवगत कराया। इस मौके पर संगोष्ठी के आयोजक सचिव डॉ. केसी पेटवाल, संयोजक डॉ. यूएस नेगी ने बताया कि संगोष्ठी में लगभग 70 गणितिज्ञ व शोधार्थी प्रतिभाग कर रहें हैं। इस अवसर पर परिसर निदेशक प्रोफेसर एए बौड़ाई, प्रोफेसर आरसी डिमरी, प्रोफेसर डीएस नेगी, प्रोफेसर एके पांडेय, प्रोफेसर वीणा जोशी, प्रोफेसर सुनीता गोदियाल, प्रोफेसर एनके अग्रवाल, प्रोफेसर बीएस बिष्ट, डॉ. शंकर लाल, डॉ. रवींद्र सिंह, डॉ. विशाल गुलेरिया, हंसराज बिष्ट, राकेश कोठारी, डॉ. सुमन गुसांई, संदीप चौहान, स्मिता डंगवाल, अर्चना बहुगुणा आदि मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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