संवाद सहयोगी, रुद्रप्रयाग: सुरक्षित यातायात व दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है। जिलाधिकारी व्यक्तिगत रूप से सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की मानिटरिंग करते हैं। साथ ही सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश भी अधिकारियों को देते हैं। 

जनपद में औसतन प्रतिवर्ष 29 व्यक्तियों की सड़क दुर्घटना में मौत हो जाती है, जबकि 65 लोग घायल हो जाते हैं। आलवेदर रोड के तहत जिले में हाईवे काफी बेहतर हो गए हैं, बावजूद इसके, अधिकांश दुर्घटनाएं भी हाईवे पर ही होती हैं। सुरक्षित यातायात के लिए प्रशासन की ओर से अब तक क्या कदम उठाए गए हैं, इसको लेकर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित से ‘दैनिक जागरण’ ने प्रशासन के रोड मैप के बारे में विस्तृत चर्चा की, जिसके मुख्य अंश प्रस्तुत हैं।

सवाल: दुर्घटनाओं के प्रति प्रशासन कितना संवेदनशील है।

जवाब: सुरक्षित यातायात व वाहन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है। यातायात नियम के विरुद्ध संचालित वाहनों के खिलाफ लगातार पुलिस, परिवहन विभाग व राजस्व विभाग की ओर से कार्रवाई अमल में लाई जाती है। नशे की हालत में वाहन चलाना, ओवर स्पीड पर कार्रवाई की जाती है। इसके लिए पुलिस के चेकिंग पोस्ट के साथ ही संयुक्त टीम की ओर से लगातार चेकिंग अभियान चलाया जाता है।

सवाल: क्या खराब सड़कें भी दुर्घटना का कारण बनती हैं।

जवाब: दुर्घटना के कई कारण हैं, जिसमें मुख्य रूप से शराब के नशे में वाहन चलाना शामिल है। अधिकांश दुर्घटनाएं हाईवे पर होती हैं, जो यह दर्शाता है कि दुर्घटनाओं में मानवीय लापरवाही मुख्य कारण है। दुर्घटनाएं रोकने के लिए बड़ी संख्या में सड़कों के गड्ढ़ों को भरा गया है। सड़कों की दशा सुधारने, क्रास बैरियर, यातायात संकेतक लगाए गए हैं।

सवाल: क्या प्रशासन सुरक्षित यातायात के प्रति आमजन को जागरूक करता है।

जवाब: पुलिस, परिवहन व राजस्व विभाग सुरक्षित यातायात के लिए इंटरनेट मीडिया, स्कूलों और गांवों में जागरूकता अभियान चलाता है। दुर्घटना के कारण व रोकने के उपाय भी बताए जाते हैं। इंटरनेट मीडिया के माध्यम से आमजन व वाहन चालकों को जागरूक किया जाता है। कैंप लगाकर भी सुरक्षित यातायात का संदेश दिया जाता है।

सवाल: सुरक्षित यातायात के लिए प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।

जवाब: सुरक्षित यातायात व्यवस्था बनाए रखने व दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन दुर्घटना प्रभावित क्षेत्रों में क्रास बैरियर, यातायात संकेतक, रोड की फिटनेस, डायवर्जन, सुरक्षा के मानक की लगातार प्रति माह समीक्षा की जाती है। सड़कों में मानकों की जो भी कमी होती है, उसको पूरा करने के निर्देश दिए जाते हैं। इसकी मानिटरिंग वह स्वयं करते हैं।

सवाल: दुर्घटना की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर प्रशासन किस भूमिका में नजर आता है।

जवाब: दुर्घटना की दृष्टि से अतिसंवेदशील स्थानों पर प्रशासन लगातार मानिटरिंग करता है। स्लाइडिंग जोन के ट्रीटमेंट के लिए कार्रवाई गतिमान है। शिवनंदी में ट्रीटमेंट कार्य किया गया है। बरसात के दौरान स्लाइडिंग जोन पर पुलिस टीम तैनात रहती हैं। आपदा कंट्रोल रूम 24 घंटे मुस्तैद रहता है। पुलिस को 24 घंटे एलर्ट पर रखा जाता है। दुर्घटना होने पर घायलों की मदद के लिए तत्काल आपदा प्रबंधन की टीम मौके पर पहुंच जाता है। पुलिस के साथ ही एसडीआरएफ और एनडीआरएफ को भी तैनात किया गया है। दुर्घटना के बाद आपदा टीम की मुस्तैदी से कई घायलों को समय पर रेस्क्यू कर जान बचाई जा चुकी है।

सवाल: दुर्घटनाओं पर अंकुश कैसे लगाया जा सकता है।

जवाब: दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए आमजन को जागरूक होना होगा। आमजन के सहयोग से ही दुर्घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है। साथ ही दुर्घटना के लिए मानवीर भूल भी मुख्य कारण बन रहा है। नशे की हालत में वाहन चलाने से सबसे अधिक दुर्घटनाएं होती हैं। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन के साथ ही आमजन का सहयोग जरूरी है।

Edited By: Shivam Yadav

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