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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 03, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सिद्धपीठ कालीमठ: कन्या का रूप धरकर देवी ने किया राक्षसों का वध

By BhanuEdited By:
Published: Mon, 03 Apr 2017 09:32 AM (IST)Updated: Tue, 04 Apr 2017 04:01 AM (IST)

जनपद रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ विकास खंड के उच्च हिमालय क्षेत्र में स्थित कालीमठ में अनादि काल से मां काली की ...और पढ़ें

सिद्धपीठ कालीमठ: कन्या का रूप धरकर देवी ने किया राक्षसों का वध
सिद्धपीठ कालीमठ: कन्या का रूप धरकर देवी ने किया राक्षसों का वध

रुद्रप्रयाग, [जेएनएन]: जनपद रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ विकास खंड के उच्च हिमालय क्षेत्र में स्थित कालीमठ में अनादि काल से मां काली की पूजा की जाती है। यहां देवी ने कन्या का रूप धरकर राक्षसों का संहार किया था। 

देवी भागवत में उल्लेख है कि इसी क्षेत्र के मनसूना स्थान में दो बड़े बलशाली राक्षस शुंभ व निशुंभ रहते थे। इन दोनों का जनता पर जुल्म बढ़ गया, कई निर्दोष इन्होंने मार डाले, इसके बाद वे राक्षस देवताओं को मारने के लिए भी उतारु हो गए। सभी देवताओं ने कालीशिला नामक स्थान पर देवी की आराधना की। 

इसके बाद देवी कालीशिला में 14 वर्ष की कन्या के रूप में प्रकट हुई। इस कन्या ने राक्षसों का वध करना शुरू कर दिया, सबसे पहले चंड व मुंड राक्षसों का वध कर कालीमठ में दोनों के सिर एक कुंडी में दबा दिया। जो कुंडी आज भी कालीमठ में मुख्य मंदिर के अंदर देखी जा सकी है।

ऐसे पहुंचे मंदिर

ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे रुद्रप्रयाग तक 130 किलोमीटर के सफर के बाद यहां से गौरीकुंड हाइवे पर गुप्तकाशी 42 किमी की दूरी पर है। गुप्तकाशी से कालीमठ मार्ग तक-10 किमी दूर जाकर पहुंचा जाता है, यहां से पैदल सौ मीटर दूरी तय कर काली नदी के दूसरे छोर पर पुल पार कर मंदिर में पहुंचा जाता है।

मंदिर का महातम्य

कालीमठ में काली माँ का मंदिर सिद्धपीठों में शामिल है। काली माँ के दर्शन कर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। चैत्र नवरात्रों में यहां विशेष पूजा होती है। कालरात्रि को पूरी रात जागरण होता है। पूर्व में यहां पर बली प्रथा का प्रचलन था जो अब बंद हो चुकी है। भक्त श्रीफल लेकर माता के दरबार में आते हैं।

कपाट खुलने का समय

यहां वर्ष भर श्रृद्धालुओं के मंदिर के कपाट खुले रहते हैं। साल भर में नवरात्रों पर दो बार विशेष पूजा होती है। दूर-दराज क्षेत्रों से भक्त माँ के दर्शनों को पहुंचते हैं।

मनोकामना होती है पूर्ण 

कालीमठ मंदिर के पुजारी सुरेशानंद गौड़ के अनुसार सिद्धपीठ कालीमठ एवं कालीशिला में नवरात्रों में स्थानीय भक्तों के साथ ही देश-विदेश के भक्त बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। नवरात्र में जो भक्त श्रद्धाभाव से मां की पूजा अर्चना करता है, उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है। 

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