संवाद सहयोगी, रुद्रप्रयाग: कार्तिकेय मंदिर समिति के तत्वावधान में क्रौंच पर्वत स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर में देव दीपावली धूमधाम से मनाई गई। रात्रि जागरण के साथ कीर्तन मंडलियों कीर्तन-भजनों की प्रस्तुति देकर भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान दंपतियों ने खड़ दीया रखकर पुत्र प्राप्ति के लिए व्रत भी रखा।

चमोली व रुद्रप्रयाग जिले के 362 गांवों का अराध्य देव भगवान कार्तिकृ स्वामी मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा पर गत रविवार को देव दीपावली धूमधाम से मनाई गई। भक्तों ने दीपक की रोशनी से मंदिर को जगमग किया। मंदिर में विशेष पूजा अर्चना के बाद भक्तों ने कीर्तन-भजनों की प्रस्तुति दी गई। क्षेत्र की पोगठा, सारी ग्वांस, बाडव, जहंगी, तडाग, उर्खोली समेत कई कीर्तन मंडलियों के भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। भजन गायिका रेखा देवी ने हे ऊंचा क्रौंच तेरा मैत्यों कू यज्ञ ठेरूचू, शरण में आ पडे स्वामी, लगा दो पार ऐ कार्तिक समेत कई भजनों ने भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। रात्रि में दंपतियों ने पुत्र प्राप्ति के लिए खड दीया रखकर व्रत भी रखा और भगवान से अपने मनवांछित फल प्राप्ति की कामना की।

वहीं सोमवार को सुबह पांच बजे भगवान का जलाभिषेक कर पूजा अर्चना के साथ दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन किया गया। मंदिर पुजारी ने कार्तिक मंदिर में विशेष पूजा अर्चना कर जलाभिषेक व आरती की। इस दौरान हवनकुंड में जौ-तिल व घी की आहुतियां डाली गई। गोरणा जाखणी के रोहित रावत की ओर से लगाए गए भंडारे का प्रसाद ग्रहण कर भक्तों ने पुण्य कमाया। कार्तिकेय मंदिर समिति के अध्यक्ष शत्रुघ्न नेगी ने बताया कि कार्तिकेय का उत्तर भारत का एकमात्र मंदिर में यहां प्रतिवर्ष जून माह में महायज्ञ का आयोजन के साथ कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली मनाने की परंपरा भी है। इस दौरान समिति के प्रबंधक पूर्ण सिंह, सचिव बलराम नेगी, लक्ष्मण सिंह नेगी, प्रदीप राणा समेत आदि मौजूद रहे। यह है मान्यता

मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव पार्वती, गणेश के 33 कोटी देवता भगवान कार्तिकेय से मिलने कुमार कार्तिकेय से क्रौंच पर्वत पहुंचते हैं। इस दिन जो भक्त सच्ची श्रद्धा और भक्ति से भगवान कार्तिकेय के दरबार में पहुंचते हैं, भगवान उसकी मनोकामना पूर्ण करते हैं।ं यही कारण है कि कड़ाके की ठंड के बावजूद हर साल हजारों की संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे और नौजवान भक्त यहां पहुंचकर भगवान का आशीष लेते हैं।

Posted By: Jagran

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