संवाद सहयोगी, रुद्रप्रयाग: नगर क्षेत्र रुद्रप्रयाग में केदारघाटी को जोड़ने वाली मोटर पुलिया जर्जर बनी हुई है। भारी वाहनों के गुजरने से यह पुल झूले के समान झूलता रहता है। केदारनाथ आपदा के समय भी इस पुल को काफी नुकसान पहुंचा था। पुल को बने लगभग पांच दशक का समय बीतने को है, लेकिन अब तक पुल की मरम्मत नहीं की जा सकी है। हालांकि पुल के पुनर्निर्माण के लिए नेशनल हाईवे की ओर से सर्वे कर आगणन केंद्र सरकार को भेजा गया है, लेकिन अभी तक इसकी स्वीकृति नहीं आई है।

नगर में 70 के दशक में बना रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड मोटरपुल अंतिम सांसें गिन रहा है। वर्तमान में पुल की स्थिति काफी दयनीय बनी हुई है। प्रतिदिन पुल से सैकड़ों वाहन आवाजाही करते हैं। कभी-कभार तो जाम लगने से पुल में बड़ी संख्या में वाहन एक साथ खडे़ नजर आते हैं। यात्रा सीजन में वाहनों का संचालन भी बड़ी संख्या में होता है। यह पुल केदारघाटी के साथ ही गौरीकुंड हाईवे को भी जोड़ता है। वर्ष 2013 में आई केदारनाथ आपदा में इस मोटरपुल को काफी नुकसान हुआ था, अलकनंदा का पानी पुल के ऊपर से बह रहा था। पुल के एक साइड की दीवार भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। लेकिन, अभी तक लोनिवि एनएच की ओर से मोटरपुल पर पुनर्निर्माण नहीं हो सका है। वहीं नगर पालिका सभासद सुरेंद्र रावत और व्यापारी चंद्रमोहन गुसाई का कहना है कि रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड को जोड़ने वाले मोटरपुल को लेकर स्थानीय जनता कई बार शासन-प्रशासन से शिकायत कर चुकी है, लेकिन पुल के पुनर्निर्माण को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

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केदारघाटी को जोड़ने के लिए मोटरपुल का सर्वे किया जा चुका है। आगणन केंद्र सरकार को भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जितेंद्र त्रिपाठी, अधिशासी अभियंता, नेशनल हाईवे सिल्ली-गौरीकुंड