यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 22, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
ग्रामीण बोले, बेहतर मुआवजा मिलेगा तो नहीं करेंगे पंचेश्वर बांध का विरोध
आधा दर्जन गांवों के लोगों ने सही विस्थापन और बेहतर मुआवजा मिलने पर बांध का विरोध नहीं करने के पक्ष में राय दी है।

पिथौरागढ़, [जेएनएन]: भारत-नेपाल की संयुक्त पंचेश्वर बांध परियोजना को लेकर रायशुमारी शुरू हो गई है। पहले चरण में नेपाल के आधा दर्जन गांवों के लोगों ने सही विस्थापन और बेहतर मुआवजा मिलने पर बांध का विरोध नहीं करने के पक्ष में राय दी है।
छह हजार मेगावाट का पंचेश्वर बांध भारत और नेपाल के बीच सीमा बनाने वाली काली नदी में बनना है। दोनो देशो की इस संयुक्त परियोजना में भारत और नेपाल के सैकड़ों गांव और कई कस्बे डूब क्षेत्र मे आ जायेंगे।
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बांध निर्माण के लिए चल रही कवायद के तहत इन दिनों डूब क्षेत्रों में आने वाले लोगों की राय ली जा रही है। इसके लिए इंडो नेपाल ज्वाइंट एक्शन फोरम का गठन किया गया है। इसकी एक इकाई नेपाल में और दूसरी इकाई भारतीय क्षेत्र के लोगों के बीच रायशुमारी कर रही है।
नेपाल इकाई ने दोधरा, चांदनी, कंचनपुर के गांवों में लोगों की राय जानने के बाद झूलाघाट (नेपाल) के लोगों के साथ बांध को लेकर तीन अलग-अलग ग्रुपों में बैठक की। बैठक में झूलाघाट और सेरा गांवों के सैकड़ों लोग शामिल हुए। डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के लोगों ने बांध निर्माण को लेकर जल्द स्थिति स्पष्ट करने के साथ ही प्रभावितों का सही ढंग से विस्थापन करने और उचित मुआवजा दिए जाने की मांगे फोरम के सदस्यों के सम्मुख रखी।
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बांध निर्माण से पहले इन मांगो के पूरा नहीं होने पर विरोध का ऐलान भी लोगों ने किया। फोरम संयोजक अशोक विक्रम और सदस्य निरंजन भाट ने कहा कि रायशुमारी के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार पंचेश्वर बांध प्राधिकरण को सौपी जाएगी। इसके बाद विस्थापन और मुआवजे की नीति तय होगी। फोरम अगली बैठक जौलजीवी मे करेगा।
