संवाद सहयोगी, पिथौरागढ़: टनकपुर-पिथौरागढ़ ऑलवेदर सड़क यात्रियों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। लगातार हो रही बारिश के चलते जगह-जगह मलबा गिरने से मंगलवार सांय को राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गया था। जिस कारण सैकड़ों यात्री मार्ग में भूखे-प्यासे ही फंसे रहे। यात्रियों ने आम खाकर पूरी रात गुजारी। बुधवार देर सांय तक भी मार्ग नहीं खुलने से कई यात्री पैदल ही अपने गंतव्य को रवाना हुए।

टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंगलवार की सांय जगह-जगह मलबा आने से बंद हो गया था। इससे मार्ग में वाहनों का संचालन पूरी तरह से ठप हो गया। मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। लंबी दूरी तय कर जाने वाले सैकड़ों वाहनों में सवार यात्री मार्ग में फंसे रहे। राजमार्ग बंद होने से जिला मुख्यालय पिथौरागढ़ में बुधवार को रसोई गैस, दूध, सब्जी, ईंधन, अखबार के वाहन भी नहीं पहुंच सके।

========== यात्रियों ने मार्ग से खुद हटाया मलबा

टनकपुर से पिथौरागढ़ को लौट रहे यात्रियों को जगह-जगह मार्ग बंद होने से खासी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। चम्पावत जिले के अंतर्गत मार्ग पर मंगलवार देर सायं भारतोली के पास सड़क बंद होने से पिथौरागढ़ की ओर आने वाले वाहनों की लंबी कतार लग गई। जिसमें महिलाएं, बच्चे, युवा, बुजुर्ग भी शामिल थे। यात्री मार्ग खुलने का इंतजार करते रहे, मगर उन्हें मौके पर कोई भी बुलडोजर मशीन नहीं पहुंची। आसपास कोई होटल-ढाबा भी नहीं होने के कारण यात्री भूखे-प्यास से बेहाल रहे। गनीमत रही कि कई यात्री मैदानी क्षेत्रों से अपने साथ आम की पेटियां लेकर आए थे। यात्रियों को आम खाकर वाहनों में ही रात गुजारनी पड़ी। बुधवार सुबह तक भी जब मार्ग खोलने के लिए कोई मशीन नहीं पहुंची तो यात्री खुद ही मार्ग से मलबा हटाते जैसे-तैसे आगे बढ़े। दोपहर बाद आगे सिंगदा के पास यात्रियों को होटल खुला मिला, जहां यात्रियों ने भोजन कर कुछ राहत की सांस ली, मगर यात्रियों के लिए मुसीबत आगे भी जारी रही। पिथौरागढ़-घाट राष्ट्रीय राजमार्ग चुपकोट बैंड व दिल्ली बैंड के पास भी मंगलवार सायं से बंद था। 22 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी मार्ग खुलने के जब कोई आसार नजर नहीं आए तो कई यात्री पैदल ही अपने गंतव्य को रवाना हो गए। ========== यात्रियों की जुबानी---- टनकपुर से पिथौरागढ़ को लौट रहे युवा रजत उप्रेती का कहना है कि वह मंगलवार शाम सात बजे भारतोली के पास पहुंच गए थे, मगर यहां मलबा आने से सड़क बंद हो गई। इसकी सूचना चम्पावत आपदा प्रबंधन को भी दी गई, लेकिन मार्ग खोलने के कोई प्रयास नहीं किए गए। जिस कारण उन्हें पूरी रात वाहन में ही गुजारनी पड़ी।

- रजत उप्रेती। =========== दिल्ली से वाहन बुक कर पिथौरागढ़ के जलतूरी गांव जा रही हूं। साथ में दो बच्चे (10 वर्ष व 13 वर्ष) भी हैं। सड़क बंद होने से 22 घंटे से सभी यात्री मार्ग पर फंसे हैं। मार्ग पर खाने-पीने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण आम खाकर पूरी रात गुजारनी पड़ी।

-सुमन।

======= टनकपुर से पिथौरागढ़ तक सड़क पर जगह-जगह मलबा गिरा है। वाहन चालक हर रोज जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग को जल्द ठीक किया जाना चाहिए।

-दीपक जोशी, वाहन चालक।

=========== टनकपुर से पिथौरागढ़ को लौट रहा था। मार्ग पर कई स्थानों पर मलबा गिरा है। पूरी रात वाहन में ही गुजारनी पड़ी। वाहन को रास्ते में ही छोड़कर आठ किमी पैदल चलकर मटेला तक पहुंचा। इसके बाद दूसरे वाहन से 24 घंटे बाद पिथौरागढ़ पहुंच सका। अब मार्ग खुलने के बाद ही वाहन को लेने जाऊंगा।

-महिपाल वल्दिया।

Edited By: Jagran