पुरातत्व विभाग के अधीन होंगे पिथौरागढ़ के प्राचीन मंदिर और लंदन फोर्ट, 12वीं और 13वीं शताब्दी से गहरा नाता
पिथौरागढ़ के दिंगास और कासनी स्थित प्राचीन मंदिरों के साथ ऐतिहासिक लंदन फोर्ट को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीन लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

HighLights
पिथौरागढ़ के प्राचीन मंदिर और लंदन फोर्ट एएसआई के अधीन।
ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और अध्ययन की महत्वपूर्ण पहल।
कुमाऊं के इतिहास को समझने में मिलेगी बड़ी मदद।
रमेश गड़कोटी, पिथौरागढ़। सीमांत जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। जिले के दिंगास और कासनी स्थित प्राचीन मंदिरों के साथ ही नगर के मध्य स्थित ऐतिहासिक लंदन फोर्ट को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीन लेने की कार्रवाई की जा रही है। इन धरोहरों का कुमाऊं के इतिहास में विशेष महत्व रहा है। पुरातत्व विभाग के संरक्षण में आने के बाद इनके ऐतिहासिक महत्व के अध्ययन, अभिलेखीकरण और संरक्षण की दिशा में काम होने की उम्मीद है।
दिंगास और कासनी के मंदिर प्राचीन स्थापत्य और धार्मिक परंपराओं के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। 13 वीं शताब्दी में बने दिंगास मंदिर से ताम्रपत्र भी मिल चुका है, जो कुमाऊंनी भाषा में हैं। क्षेत्र के अतीत, तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था और ऐतिहासिक गतिविधियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है।
वहीं, कासनी मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित है। जिले में भगवान विष्णु के प्राचीन मंदिरों की संख्या अपेक्षाकृत कम होने के कारण यह मंदिर विशेष महत्व रखता है। कासनी मंदिर जिला मुख्यालय से छह किलोमीटर दूर बसे कासनी गांव में स्थित है।
प्राचीन इतिहास को समझने में मिलेगी मदद
इन मंदिरों को पुरातत्व विभाग के अधीन लेने की कार्रवाई पूरी होने के बाद इनके स्थापत्य, प्रतिमाओं, अभिलेखों और उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों का व्यवस्थित अध्ययन होगा। इसके साथ ही मंदिरों की वर्तमान स्थिति का आकलन कर आवश्यकतानुसार वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण और मरम्मत, परिसर की सुरक्षा तथा ऐतिहासिक विवरणों के दस्तावेजीकरण जैसे कार्य भी होंगे। इससे कुमाऊं के प्राचीन इतिहास और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने लाने में मदद मिल सकती है।
नगर के बीचोंबीच स्थित लंदन फोर्ट पर भी नजर
पिथौरागढ़ नगर के मध्य स्थित लंदन फोर्ट भी ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण धरोहर है। इसे किले का निर्माण 1791 में हुआ इसे भी पुरातत्व विभाग के अधीन लेने की कार्रवाई की जा रही है। विभाग के संरक्षण में आने के बाद किले की संरचना और ऐतिहासिक विशेषताओं का अध्ययन, आवश्यक संरक्षण कार्य तथा इसके इतिहास से जुड़ी जानकारियों का संकलन किया जा सकता है। इससे इस धरोहर को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने के साथ ही पिथौरागढ़ की ऐतिहासिक पहचान को भी मजबूती मिल सकती है।
जिले के दो प्राचीन मंदिर और लंदन फोर्ट को पुरातत्व विभाग के अधीन लिये जाने की कार्रवाई की जा रही है। इसका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। इन महत्वपूर्ण धरोहरों के विभाग के अधीन होने पर मानकों के अनुसार विभिन्न कार्य कराये जायेंगे।
-चंद्र सिंह चौहान, जिला प्रभारी भारतीय पुरातत्व विभाग
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