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5G के दौर में भी नेटवर्क के लिए तरसे पिथौरागढ़ के ग्रामीण, पेड़ों पर चढ़कर करते हैं मोबाइल पर बात

Published: Thu, 29 Oct 2026 11:42 AM (IST)Updated: Thu, 29 Oct 2026 11:49 AM (IST)

5जी के दौर और इंटरनेट दिवस के बावजूद, पिथौरागढ़ के चीन-नेपाल सीमावर्ती गांवों में मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी का अभाव है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

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जागरण संवाददाता, पिथौरागढ़। आज जब पूरी दुनिया इंटरनेट दिवस मना रही है और देश में 5जी की रफ्तार का जश्न मनाया जा रहा है, तब सीमांत जिले पिथौरागढ़ की हकीकत इन सबसे कोसों दूर है।

सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण चीन और नेपाल की सीमा से लगे दुर्गम गांवों में आज भी ग्रामीण एक अदद मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट के लिए तरस रहे हैं।

डिजिटल इंडिया के इस दौर में भी सीमांत के लोगों को अपनों से बात करने या इंटरनेट का उपयोग करने के लिए ऊंची चोटियों या पेड़ों पर चढ़ने की मजबूरी का सामना वर्तमान तक करना पड़ रहा है।

जोहार घाटी में नेटवर्क की स्थिति अब तक शून्य

चीन सीमा से सटे उच्च हिमालयी क्षेत्रों तक संचार टावर तो पहुंचा दिए गए हैं, परंतु प्रसिद्ध जोहार घाटी में नेटवर्क की स्थिति अब तक शून्य ही बनी हुई है। यहां के निवासियों के लिए इंटरनेट तो दूर, सामान्य कॉल करना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।

दूसरी ओर, नेपाल सीमा से लगे कई क्षेत्रों का हाल भी कुछ ऐसा ही है। यहां नेटवर्क की स्थिति इतनी अजीब है कि मकान के एक कमरे में अगर मोबाइल के सिग्नल आते हैं, तो दूसरे कमरे में जाते ही कमजोर नेट मिलता है, जिससे रोजमर्रा के कामकाज प्रभावित होते हैं। कमजोर नेट के चलते इन क्षेत्रों में विद्यार्थी वर्ग प्रभावित है। यह वर्ग ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पा रहा है।

विडंबना यह है कि पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय सहित जिले की सभी तहसीलों के मुख्यालयों में 5जी नेटवर्क धड़ल्ले से चल रहा है, लेकिन जैसे ही आप सफर पर निकलते हैं, 4जी नेटवर्क भी पूरी तरह लाचार हो जाता है।

ऐसे में इंटरनेट दिवस पर सीमांत के बाशिंदों की सरकार व संचार कंपनियों से एक ही गुहार है कि उनके क्षेत्रों को भी जल्द से जल्द निर्बाध और सशक्त नेटवर्क से जोड़ा जाए। 5जी नेटवर्क से संचार के क्षेत्र में होने वाले परिवर्तन के लिए सीमांत जिले की लगभग एक चौथाई आबादी को लंबा इंतजार करने के आसार हैं।

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