जागरण संवाददाता, पिथौरागढ़: क्लिनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत सीमांत के चिकित्सकों ने पंजीकरण करा पाने में असमर्थता जताई है। 14 सितंबर तक आईएमए की मांग नहीं मानी गई तो 15 सितंबर से अस्पतालों को सील होने से रोकने के लिए स्वत: ही अस्पताल बंद होने लगेंगे।

यह निर्णय इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की पिथौरागढ़ शाखा ने लिया है। इस संबंध में रविवार को आइएमए की स्थानीय शाखा की बैठक हुई । जिसमें कहा गया कि पिथौरागढ़ के निजी अस्पताल और क्लीनिक सीईए के तहत पंजीकरण करा पाने में असमर्थ है। इस एक्ट के मानक काफी जटिल हैं। इन मानकों का पालन कर इलाज करने पर इलाज पांच गुना महंगा हो जाएगा। बैठक में इस एक्ट को जनविरोधी और राज्य की भौगोलिक स्थिति के विपरीत बताया।

इस मौके पर आइएमए के सचिव डॉ. जेसी गड़कोटी ने कहा कि सीईए में पचास बैड से कम अस्पतालों , क्लीनिकों, डे केयर सेंटर , डायनोस्टिक पेथौलॉजी सेंटर को छूट मिलनी चाहिए, पचास बैड से अधिक वाले अस्पताल को हरियाणा सरकार की तरह छूट दी जाए। उन्होंने कहा कि जेनरिक दवाएं डॉक्टरों के हाथों में नहीं है, सरकार को चाहिए कि ब्रांडेड दवाईयों की कंपनी का लाइसेंस बंद कर दे जिससे कि दवाईयां बाजार में ही नहीं आ सके । उन्होंने कहा कि आइएमए की इन मांगों को यदि सरकार नहीं मानती है तो आगामी 15 सितंबर से डायगनोस्टिक सेंटर सहित सभी निजी अस्पताल मजबूरीवश सील होने से रोकने हेतु स्वत: ही बंद हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार चिकित्सकों से वार्ता करने को तैयार नहीं है।

इस मौके पर श्री गड़कोटी ने कहा कि सरकार इस स्थिति से बचने के लिए प्रदेश में सीईए को राज्य के अनुरू प बनाए। बैठक में डॉ. जेसी गड़कोटी, डॉ.विजय जोशी, डॉ. पीएस बसेड़ा, डॉ. वीएस गौतम, डॉ.अनूप सिंह, डॉ. पीसी पंत, डॉ.आरपी खर्कवाल, डॉ. मयंक बिष्ट, डॉ.एके पुनेठा, डॉ. लाल सिंह बोरा आदि उपस्थित थे।

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