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पिथौरागढ़ में मूसलाधार बारिश से भारी तबाही: 36 घंटे से NH ठप, कैलास मानसरोवर मार्ग का हिस्सा बहा

Published: Sun, 27 Sep 2026 08:51 AM (IST)

पिथौरागढ़ में 48 घंटों की मूसलाधार बारिश और भूस्खलन से भारी तबाही हुई है, जिससे जिले का संपर्क शेष दुनिया ...और पढ़ें

जेसीबी से रास्ता सही करने की कोशिश।

जेसीबी से रास्ता सही करने की कोशिश।

HighLights

  1. पिथौरागढ़ में 48 घंटे की मूसलाधार बारिश ने मचाई भारी तबाही

  2. भूस्खलन से राष्ट्रीय राजमार्ग सहित कई सड़कें पूरी तरह बंद

  3. काली नदी खतरे के निशान के करीब, 17 संपर्क मार्ग अवरुद्ध

जागरण संवाददाता, पिथौरागढ़। सीमांत जनपद में बीते 48 घंटों से जारी मूसलधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। लगातार हो रहे भूस्खलन और सड़कों के मलबे में तब्दील होने से पिथौरागढ़ का शेष जगत से संपर्क पूरी तरह कट गया है। सामरिक और जनहित की दृष्टि से महत्वपूर्ण अधिकांश मार्ग बंद होने से समूचा जिला अलग-थलग पड़ गया है।

टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर घाट के समीप पहाड़ी से लगातार भारी बोल्डर और मलबा गिर रहा है, जिसके चलते पिछले 36 घंटे से यातायात ठप पड़ा है। मार्ग के दोनों ओर सैकड़ों वाहन फंसे हैं। कूलागाड़ के पास भी हाईवे बंद होने से आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध हो चुका है।

उधर, कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग पर गस्कू, मलघाट के पास बोल्डर और एस-बैंड के समीप सड़क का एक बड़ा हिस्सा बहने से चीन सीमा का संपर्क टूट गया है। मुनस्यारी-मिलम मार्ग पर भी विशालकाय बोल्डर गिरने से आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है।

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कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग पर पैलसिती में एस बैंड पर बही सड़क।

खतरे के निशान के करीब काली नदी, दर्जनों गांव अलग-थलग

धारचूला में काली नदी चेतावनी स्तर को पार कर चुकी है, जिससे नदी किनारे वाले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। जिले के करीब 17 संपर्क मार्ग मलबा आने से बंद हो चुके हैं, जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क कट चुका है।

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17 सड़कें बंद, उफान पर काली नदी, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भारी हिमपात

निचले क्षेत्रों में बारिश के बीच उच्च हिमालयी गांवों में लगातार भारी हिमपात हो रहा है। पिथौरागढ़ मुख्यालय में अधिकतम तापमान लुढ़क कर 14 डिग्री और न्यूनतम 9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं मुनस्यारी में अधिकतम तापमान 8 डिग्री और न्यूनतम पारा 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। बिगड़े मौसम और लगातार गिर रहे पत्थरों के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है और लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं।